db News Network

Home » सीएम योगी ने सपा और कांग्रेस को लिया आड़े हाथ, कही ये बातें

सीएम योगी ने सपा और कांग्रेस को लिया आड़े हाथ, कही ये बातें

0 comments 75 views 3 minutes read

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को अलीगढ़ के कस्बा खैर पहुंचे। यहां गुरुकुल पब्लिक स्कूल में रोजगार मेले का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कृष्णा और रूद्र नाम के बच्चों का अन्न प्राशन किया। यहां टैबलेट, लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरण और सात सौ करोड़ से अधिक की लागत के 304 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

सीएम योगी में कहा कि, स्वामी हरिदास, बलदाऊ की भूमि से प्रख्यात जिले में सभा का स्वागत करता हूं। खैर से आपने अनूप प्रधान को विधायक चुना, अब वह सांसद चुने गए हैं। उन्होंने अलीगढ़ और हाथरस की जनता का इसके लिए आभार जताया। सीएम ने कहा, कि विकास के साथ सुरक्षा भी जरूरी है, सुशासन के बिना कुछ भी नहीं है। युवाओं को रोजगार दिए बिना कुछ नहीं। अब देश आगे बढ़ रहा है। सरकार में रोजगार दिए जा रहे हैं। कंपनियां सरकार के साथ मिलकर युवाओं के पास रोजगार देने के लिए जा रहे हैं। स्मार्ट फ़ोन वितरण किए जा रहे हैं। आजादी के बाद से अलीगढ़ विकास को तड़प रहा था। जाति के नाम पर बांट रहे थे। विकास के नाम पर कुछ नहीं किया।

यहां 2014 के पहले ही विकास हो जाता, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। हमने कोई भेदभाव नहीं किया। सबको बिजली, सबको रोजगार दिया। दो करोड़ युवाओं को प्रदेश में रोजगार दिया। सभी काेपानी और सड़क दी। जति के नाम पर नहीं मजहब के नाम पर नहीं। किसी ने जाति नहीं पूछी। मोदी का मंत्र है सबका साथ और सबका विकास। लेकिन अराजकता फैलाने की छूट किसी को नहीं देंगे। बेटियों की सुरक्षा की छूट नहीं देंगे। अगर दुस्साहस किया तो उसका रास्ता सीधे यमराज के पास जाता है। देश को आगे ले जा रहे हैं, विपक्ष अफवाह फैला जा रहा है, अराजकता फैला रहा है, जातियों में बांट रहा है। वीर पुरुषाें का अपमान विपक्षियों ने किया, भाजपा ने सम्मान दिया। राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर बना विश्वविद्यालय इसका उदाहरण है।

सपा के मुखिया बेटी की सुरक्षा पर नहीं बोले, कोलकाता के मामले पर यह लोग दरिंदों का सहयोग करते हैं। अयोध्या और कन्नौज में भी यही हुआ। इनके अंदर जिन्ना की आत्मा घुस गई है। यह भी देश और समाज को बांट रहे हैं। जिन्ना घुट−घुट कर मरा था। हमारा मिशन विकास है। इनकी अराजकता और गुंडागर्दी चलने नहीं देंगे। मोदी जी ने अलीगढ़ को डिफेंस कॉरिडोर दिया है। यहां तोप बनेंगीं। यहां राइफल बनेंगींं। ये दुश्मनों का सीना चीर देंगींं।यहां काम शुरू हो गया है। हम रक्षा क्षेत्र में आत्मा निर्भर बन रहे हैं।

सीएम ने कहा, कि सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश को दंगा प्रदेश बना दिया था। बेटियों और व्यापारियों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सम्मान सबको देंगे। विकास सबको देंगे। मगर किसी को कानून हाथ में नहीं लेने देंगे। हम इनकी संपत्ति छीनगर गरीबों में बांट देंगे। प्रयगराज में हमने यही किया। माफिया की जमीन पर पीएम आवास बना दिए हैं। उज्जवला, आयुष्यान योजनाओं का लोगों को लाभ दिया जा रहा है। बिजली में कोई भेदभाव नहीं है। खेल कोटे में नौकरी दे रहे हैं।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।