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कांग्रेस ने अटल पेंशन योजना को लेकर भाजपा को घेरा

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने मंगलवार को अटल पेंशन योजना को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया। इस दौरान कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक “बहुत खराब तरीके से डिजाइन की गई योजना” और “कागजी शेर” है जिसके लिए लोगों को इसमें भाग लेने के लिए लोगों को धोखा देने और मजबूर करने के लिए अधिकारियों की जरूरत है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह योजना मोदी सरकार की नीति निर्माण का उपयुक्त प्रतिनिधित्व है: हेडलाइन प्रबंधन, जिसका वास्तव में कुछ लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।

उनका हमला एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि असंगठित क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार की पेंशन योजना, अटल पेंशन योजना (एपीवाई) से बाहर निकलने वाले तीन ग्राहकों में से लगभग एक ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके खाते उनकी “स्पष्ट” अनुमति के बिना खोले गए थे। रिपोर्ट में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) की हालिया सैंपल स्टडी का हवाला दिया गया है।

रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) 24 मार्च को बेंगलुरु में थीं, जहां वह मोदी सरकार द्वारा ‘प्रमुख सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम’ के रूप में शुरू की गई अटल पेंशन योजना के लाभों की घोषणा कर रही थीं।

उन्होंने एक्स पर मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए कहा, ठीक एक दिन बाद, यह सामने आया। इस योजना के एक तिहाई ग्राहकों को अपने कोटा को पूरा करने के इच्छुक अधिकारियों द्वारा ‘स्पष्ट अनुमति’ के बिना योजना में नामांकित किया गया था।

उन्होंने कहा करीब 83 फीसदी ग्राहक रुपये के सबसे निचले स्लैब में हैं। 1,000 पेंशन, क्योंकि इसके लिए मासिक योगदान कम है और यह लाभार्थियों द्वारा इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। रमेश ने कहा ग्राहकों के लिए, रिटर्न की राशि बहुत आकर्षक नहीं है क्योंकि यह एक निश्चित आय पेंशन है, जो बढ़ती कीमतों के साथ मूल्य खो देती है।

उन्होंने कहा, ‘फ्लैगशिप’ अटल पेंशन योजना एक बहुत ही खराब तरीके से डिजाइन की गई योजना है, एक कागजी शेर है जिसमें लोगों को इसमें भाग लेने के लिए लोगों को धोखा देने और मजबूर करने के लिए अधिकारियों की जरूरत होती है। यह मोदी सरकार की नीति निर्धारण का एक उपयुक्त प्रतिनिधित्व है: हेडलाइन प्रबंधन, जिसका वास्तव में लोगों तक बहुत कम लाभ पहुंच रहा है!

अटल पेंशन योजना (एपीवाई), भारत के नागरिकों के लिए एक पेंशन योजना, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित है।

APY के तहत, न्यूनतम 1,000/- या 2,000/- या 3,000/- या 4,000 या 5,000/- प्रति माह रु. की पेंशन ग्राहकों के योगदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु पर दिया जाएगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।