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कांग्रेस ने एमपी की 14 सीटों पर तय किए उम्मीदवार

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश में भाजपा के बाद कांग्रेस पार्टी भी अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान जल्द कर सकती है। सोमवार को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। इसमें राज्य की सभी 29 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार के नामों को लेकर मंथन हुआ। कांग्रेस ने करीब 14 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। सूत्रों का कहना है कि मंगलवार या बुधवार तक कांग्रेस दूसरी लिस्ट जारी कर देगी। इसमें एमपी की 14 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि सतना सीट से सिद्धार्थ कुशवाहा, छिंदवाड़ा सीट से नकुलनाथ, राजगढ़ सीट से प्रियव्रत सिंह, भिंड सीट से फूल सिंह बरैया, टीकमगढ़ सीट से पंकज अहिरवार, सीधी से कमलेश्वर पटेल, बैतूल सीट से रामू टेकाम और धार सीट से सुरेंद्र सिंह बघेल हनी कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे।

बैठक के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश की 70 प्रतिशत सीटों पर उम्मीदवार तय हो गए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी हाईकमान इनकी घोषणा करेगा। जहां तक बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की बात है तो वह पार्टी अलाकमान तय करेगा। खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर पटवारी ने कहा कि वह पार्टी के निर्देश के अनुसार काम करेंगे। इसी बीच प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी कांग्रेस प्रत्याशियों की लिस्ट कर जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दो से तीन दिनों में पार्टी मध्य प्रदेश के उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी।

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और गुजरात समेत छह राज्यों की लोकसभा सीटों को लेकर चर्चा हुई। कांग्रेस पार्टी ने 8 मार्च को 39 लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसमें छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, मेघालय, नगालैंड, सिक्किम, तेलंगाना और त्रिपुरा की लोकसभा सीटों के लिए नामों की घोषणा की गई। इनमें से 16 केरल से, सात कर्नाटक से, 6 छत्तीसगढ़ से और 4 तेलंगाना से थे।

पहली सूची में पार्टी ने 20 नए उम्मीदवार उतारे हैं। 19 सीटों पर पुराने उम्मीदवारों को बरकरार रखा गया है। राहुल गांधी केरल की वायनाड सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव लड़ेंगे। शशि थरूर को केरल के तिरुवनंतपुरम से लगातार चौथी बार टिकट मिला है। छत्तीसगढ़ में पांच और तेलंगाना में छह पुराने उम्मीदवारों के टिकट काट दिए गए हैं। कांग्रेस ने भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू और केसी वेणुगोपाल जैसे दिग्गजों को मैदान में उतारा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।