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कांग्रेस का ने भाजपा सरकार पर जमकर बोला हमला

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में बीते दिनों से दिख रहे लगातार बीजेपी के एक तरफ चुनाव प्रचार के बाद अब जिले में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं की भी सक्रियता मैदान में नजर आने लगी है। इसी बीच जिले के कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की टीम में शामिल मनोज शर्मा ने पत्रकार वार्ता के दौरान जहां एक ओर भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला, वहीं कांग्रेस के पांच न्याय को लेकर मतदाताओं के बीच जाने और उनके सामने अपनी बात रखने की बात कही। वहीं इस दौरान उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक फैले हिंदुस्तान के हर हिंदुस्तानी के दिलों की बात कांग्रेस के न्याय पत्र में रखने की बात कही।

नागपुर से आए कांग्रेस के मुख्य वक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि दस साल से देश में दमनकारी सरकार चल रही है। कांग्रेस पांच गारंटी के साथ चुनाव में उतरेगी। इसमें युवा न्याय, नारी न्याय ,किसान न्याय, श्रमिक न्याय, हिस्सेदारी न्याय शामिल है। युवा न्याय के अंतर्गत हर शिक्षित युवा को पहली नौकरी पक्की एवं एक लाख का वेतन, नारी न्याय के अंतर्गत हर गरीब परिवार की महिला को एक लाख रुपये हर साल दिया जाएगा। किसान न्याय के अंतर्गत किसानों की कर्ज माफी और एमएसपी की कानूनी गारंटी स्वामीनाथन फार्मूला वाली दी जाएगी, श्रमिक न्याय के अंतर्गत 400 रु प्रतिदिन कम से कम मजदूरी जो कि मनरेगा में भी दी जाएगी, हिस्सेदारी न्याय के अंतर्गत गिनती करो सामाजिक व आर्थिक समानता के लिए हर व्यक्ति हर वर्ग की गिनती की जाएगी।

केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम मोदी पर भी जमकर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी जी मंगलसूत्र की बात तो करते हैं, लेकिन महंगाई, महिला सुरक्षा और मणिपुर की बात क्यों नहीं करते। मोदी जी सब कुछ कहें पर ब्याहताओं के मंगलसूत्र पर न बोलें और खासकर उस महिला के बारे में जिसके सुहाग ने देश के लिए अपनी कुर्बानी दी है। उन्होंने कहा कि मोदी ने दो हिंदुस्तान बना दिए हैं, एक अमीरों का और गरीबों को। अमीरों का कर्जा माफ करते हैं और गरीबों पर अत्याचार करते हैं। भाजपा की स्थिति खराब है, लोकसभा चुनाव में 400 पार 400 पार चिल्लाने वालों की हवा निकल जाएगी। भाजपा साउथ में साफ हो रही है, और नार्थ में हाफ यही हैं भाजपा का ग्राफ।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।