db News Network

Home » बीजेपी के घोषणापत्र पर कांग्रेस ने जमकर बोला हमला

बीजेपी के घोषणापत्र पर कांग्रेस ने जमकर बोला हमला

0 comments 53 views 2 minutes read

नई दिल्ली। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए जारी भाजपा के घोषणापत्र को बयानबाजी से भरा जुमला पत्र करार दिया। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर नौकरियां देने, किसानों की आय दोगुनी करने और मंहगाई से निपटने के वादे को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि वह अब 2047 के बारे में बात करके मुद्दा ही बदल दे रहे हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा के घोषणापत्र और पीएम मोदी के भाषण से महंगाई और बेरोजगारी गायब है। लोगों के जीवन से जुड़े सबसे अहम मुद्दों पर भाजपा चर्चा तक करना नहीं चाहती। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, आइएनडीआइए की योजना बिल्कुल स्पष्ट है-30 लाख पदों पर भर्ती और हर शिक्षित युवा को एक लाख की पक्की नौकरी।

युवा इस बार मोदी के झांसे में नहीं आने वाले। अब वे कांग्रेस का हाथ मजबूत कर देश में रोजगार क्रांति लाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मोदी की गारंटी ‘जुमलों की वारंटी’ है, क्योंकि वह पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया-पुरानी गारंटियों के लिए कोई जवाबदेही नहीं, कोरी बयानबाजी! खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान कोई ऐसा बड़ा काम नहीं किया, जिससे देश की जनता को फायदा हो। युवा नौकरी मांग रहे हैं।
महंगाई के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन भाजपा के घोषणापत्र में इस पर कोई बात नहीं की गई है।कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि 2014 के अपने घोषणापत्र में मोदी ने एक विशेष कार्यबल बनाकर काला धन वापस लाने का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय आए चुनावी बांड।

भाजपा ने पूर्वोत्तर में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का भी वादा किया था। लेकिन, आज मणिपुर में हिंसा जारी है और प्रधानमंत्री मोदी चुप्पी साधे हुए हैं। राम मंदिर मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर खेड़ा ने कहा कि राम आस्था का मुद्दा हैं, राजनीति का नहीं। हम भाजपा को उन्हें राजनीति में घसीटने की इजाजत नहीं देंगे।खेड़ा ने कहा कि हमें भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ नाम पर कड़ी आपत्ति है। इसके बदले इसे माफीनामा कहा जाना चाहिए। मोदी को दलितों, किसानों, युवाओं और आदिवासियों से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कहा कि भाजपा का संकल्प पत्र सिर्फ एक दिखावा है। उनका असली घोषणापत्र है-संविधान बदलो पत्र। गली-गली, राज्य दर राज्य भाजपा के नेता और प्रत्याशी संविधान बदलो पत्र लेकर घूम रहे हैं और भाषणों में बाबा साहेब के संविधान को बदलने की बात कर रहे हैं।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।