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कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने EC के खिलाफ विपक्षी नेताओं को लिखा पत्र

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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा चुनाव के दो चरणों के मतदान के आंकड़े जारी करने में चुनाव आयोग की देरी पर सवाल उठाते हुए विपक्षी आइएनडीआइए गठबंधन के नेताओं को पत्र लिख चुनाव आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा करने के लिए सामूहिक आवाज उठाने की जरूरत बताई है। वोटिंग आंकड़े में विलंब के साथ ही चुनाव क्षेत्र के पंजीकृत मतदाताओं और मतदान करने वाले लोगों का आंकडा जारी नहीं करने पर चिंता जताते हुए आयोग से इसका कारण पूछा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा ”हम सभी जानते हैं कि पहले दो चरणों में मतदान के रुझान और कमजोर होते चुनावी भविष्य से पीएम मोदी और भाजपा किस तरह घबराए हुए और निराश हैं। पूरा देश जानता है कि सत्ता के नशे में चूर एक निरंकुश शासन कुर्सी पर बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

शरद पवार को लिखे पत्र की प्रति खरगे ने X पर पोस्ट की
आइएनडीआइए के वरिष्ठ नेता शरद पवार को लिखे पत्र की प्रति खरगे ने अपने एक्स पोस्ट पर जारी की। खरगे ने कहा कि हालिया घटनाक्रम से जाहिर है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। तीसरे चरण की अंतिम पंजीकृत मतदाता सूची भी जारी नहीं की गई। खरगे ने आरोप लगाया है कि इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संशय के काले बादल मंडरा रहे हैं और अपने 52 साल के चुनावी जीवन में कभी भी अंतिम प्रकाशित आंकड़ों में मतदान प्रतिशत में इतनी अधिक वृद्धि उन्होंने नहीं देखी है।

खरगे ने पूछा कि क्या इवीएम को लेकर कोई समस्या है? पहले चरण के लिए मतदान की समाप्ति की तारीख और आंकड़ा जारी करने में हुए विलंब तक मतदान प्रतिशत में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि क्यों हुई है? मतदान आंकड़े में संसदीय क्षेत्र और संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में डाले गए वोट जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ें क्यों नहीं जारी किए गए हैं? खरगे ने कहा है कि आयोग के अनुसार उम्मीदवारों के पो¨लग एजेंटों के पास प्रत्येक मतदान केंद्र का सटीक मतदाता डेटा होता है। इसका मतलब है कि आयोग के पास यह आंकड़ा है तो फिर लोगों के लिए प्रकाशित करने से क्या रोक रहा है? क्या चुनाव आयोजन की बुनियादी बातों में इस घोर कुप्रबंधन के लिए चुनाव आयोग को जवाबदेह बनाया जाएगा?

‘एकजुट होकर ऐसी विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठाएं’
इन सवालों के साथ खरगे ने कहा है कि ”सभी तथ्य हमें एक प्रश्न पूछने के लिए मजबूर करते हैं – क्या यह अंतिम परिणामों से छेड़छाड़ करने का प्रयास हो सकता है?” पवार के साथ विपक्षी गठबंधन के सभी नेताओं से पत्र में खरगे ने आग्रह किया है कि सामूहिक रूप से सभी एकजुट होकर स्पष्ट रूप से ऐसी विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठाएं क्योंकि हमारा एकमात्र उद्देश्य एक जीवंत लोकतंत्र की संस्कृति और संविधान की रक्षा करना है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।