नई दिल्ली। संसद के कामकाज में बाधा के लिए विपक्ष पर आरोप लगाने के लिए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पलटवार किया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पिछले दो दशक के आंकड़े बताते हैं कि संसद के कामकाज में सबसे ज्यादा बाधा 15वीं लोकसभा (2009-2014) के दौरान डाली गई जब भाजपा प्रमुख विपक्षी दल थी।
उन्होंने कहा कि यह भाजपा है जो संसद के चीरहरण में शामिल रही है और देश के लोकतंत्र लिए खतरा पैदा किया। खरगे ने आरोप लगाया कि निरंकुश भाजपा सरकार संसदीय लोकतंत्र का क्षरण कर रही है, संविधान का उल्लंघन कर रही है और विपक्ष की आवाज का गला घोंट रही है। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों के 146 सदस्यों के निलंबन का अभूतपूर्व कदम उठाने के बाद सिर्फ तीन दिनों के भीतर 14 विधेयकों को पारित करा लिया गया था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्तमान लोकसभा में पारित किए गए 172 विधेयकों में से 64 को एक घंटे से भी कम समय की चर्चा में पारित कराया गया है और इसी दौरान राज्यसभा से 61 विधेयकों को भी एक घंटे से कम की चर्चा में पारित कराया गया। खरगे ने एक बयान में कहा, ‘प्रधानमंत्री ने संसद के बाहर एक बयान दिया। हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि कैसे उनकी सरकार संसदीय लोकतंत्र के क्षरण के लिए जिम्मेदार है।’
उन्होंने आरोप लगाया वर्तमान लोकसभा बिना डिप्टी स्पीकर के अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लेगी, जो पद परंपरागत रूप से विपक्षी सदस्य के लिए आरक्षित होता है। यह दिखाता है कि निरंकुश मोदी सरकार कैसे संविधान का उल्लंघन कर रही है और विपक्षी की आवाज का गला घोंट रही है।’
खरगे ने कहा कि 17वीं लोकसभा सबसे कम बैठकों वाली ऐसी लोकसभा होगी जिसने अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है। रिकॉर्ड संख्या में विधेयकों के पारित करने के पीएम के दावे पर उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में दोनों सदनों से 179 विधेयक पारित किए गए थे और दूसरे कार्यकाल में 213 विधेयक पारित किए गए। जो भाजपा द्वारा डाली गई बाधा के बावजूद संप्रग-1 के कार्यकाल में पारित 297 विधेयकों और संप्रग-2 के कार्यकाल में पारित 248 विधेयकों से कम हैं।’





