db News Network

Home » केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस का दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, कर्नाटक के CM सहित कई बड़े नेता जंतर मंतर पर

केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस का दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, कर्नाटक के CM सहित कई बड़े नेता जंतर मंतर पर

0 comments 37 views 3 minutes read

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया भी केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंच गए हैं। यहां पत्रकारों से उन्होंने कहा हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे विरोध को सुनेगी। हमारा मुख्य उद्देश्य राज्य और कन्नड़ लोगों के हितों की रक्षा करना है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा, ‘कर्नाटक दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, जो इस देश को सबसे ज्यादा राजस्व दे रहा है। हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, हम अपना हिस्सा मांग रहे हैं। हम यहां यह दिखाने आए हैं कि हम सभी कर्नाटक के लोगों के लिए लड़ रहे हैं।’

इससे पहले, शिवकुमार ने कहा हम अपने अधिकारों के लिए पूछ रहे हैं, हमें जो भी फीसदी मिलना चाहिए, उसका 13 फीसदी मिल रहा है। अगर अन्य राज्यों को लाभ मिलता है तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने (केंद्र ने) गुजरात को जो नीतियां, योजनाएं दी हैं उन्हें हमें भी देना चाहिए।

मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा चार-पांच मांगें हैं। करों को लेकर जो अन्याय हो रहा है उसके खिलाफ लड़ रहे हैं। इसके अलावा हमें सूखा राहत राशि नहीं मिल रही है। इन्हीं सबको लेकर हम विरोध कर रहे हैं। केंद्र को समझना चाहिए कि कर्नाटक एक आर्थिक महाशक्ति है।

विरोध प्रदर्शन को लेकर कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा केंद्र सरकार ने हमारे राज्य से लगभग 4,50,000 रुपये का कर जुटाया है, लेकिन हमें सिर्फ 50,000 रुपये मिल रहे हैं। इस वर्ष 236 तालुकों में से 220 तालुकों को सूखे से प्रभावित घोषित किया गया है। अभी तक कर्नाटक के लिए एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है।’

वहीं, मंत्री केएच मुनियप्पा ने कहा हम सरकार से नाराज नहीं हैं। भारत सरकार ने कर्नाटक में सूखे की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति भेजी है और रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अंत में, मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री से मुलाकात की जो सूखे की स्थिति के बारे में चिंतित थे और गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे धनराशि जारी करेंगे। आज तक, उन्होंने धनराशि जारी नहीं की है। हमने धन प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास किए हैं। यह अंतिम उपाय है, हमें विरोध करना होगा।

दिल्ली में होने वाले विरोध-प्रदर्शन पर IYC अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने कहा आज पूरा कर्नाटक मंत्रिमंडल कर्नाटक सरकार को सही कर राशि का भुगतान करने की मांग करने के लिए केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली आया है। वित्त मंत्री चर्चा के लिए तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ यहां जंतर-मंतर पर केंद्र द्वारा किए गए अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।