भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बहाने चुनाव पूर्व सीमांचल में कांग्रेस अपना शक्ति परीक्षण भी करेगी। सीमांचल में किशनगंज, अररिया व कटिहार में मुस्लिम वोट बैंक का एकतरफा रुझान लोकसभा चुनाव परिणाम को प्रभावित करता है। पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में दुलालचंद्र गोस्वामी चुनाव जीतने में सफल रहे थे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार मोदी फैक्टर के कारण ही एनडीए प्रत्याशी की जीत हुई थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व सांसद तारिक अनवर को उन्होंने शिकस्त दी थी। हालांकि, मुस्लिम बहुल इलाकों में तारिक को आशा के अनुरूप वोट मिले थे। तारिक अनवर लोकसभा में पांच बार कटिहार का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
जदयू के महागठबंधन में रहने तक तारिक को लोकसभा चुनाव में टिकट मिलना मुश्किल ही थी। जदयू के भाजपा के साथ राज्य में एनडीए सरकार बनाने के बाद सिटिंग सीट होने के कारण जदयू कटिहार में अपनी दावेदारी करेगा। सीट शेयरिंग को लेकर अंदखाने में क्या हो रहा है, यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।
जानकारों के अनुसार बदले राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा भी कटिहार सीट पर अपनी दावेदारी कर सकती है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा ने चुनाव में जातीय समीकरण को बहुत हद तक तोड़ने का काम किया है।
कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट पर फिर से राजनीतिक जमीन के लिए संजीवनी तलाशने की कोशिश राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा से कर रही है। कटिहार संसदीय सीट पर भाजपा के निखिल चौधरी भी तीन बार 1999, 2004 व 2009 के चुनाव में तारिक अनवर को शिकस्त दी थी।





