भोपाल । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर देश में अघोषित आपातकाल लगाने का आरोप लगाया। ईडी, आइटी और सीबीआइ के माध्यम से पहले नोटिस दिए जाते हैं और फिर चंदा लिया जाता है। इलेक्टोरल बांड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में उन्होंने कहा कि कई ऐसी कंपनियों से चंदा लिया गया, जिन्हें मोदी सरकार ने ही संदिग्ध की श्रेणी में रखा था। उधर, लोकतंत्र का गला घोंटते हुए देश के सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के बैंक खातों को वर्षों पुराने प्रकरण निकालकर नियम विरुद्ध फ्रीज कर दिया ताकि हम चुनाव ही न लड़ सकें। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भाजपा में आने का दबाव बनाया जा रहा था पर जब वे नहीं माने तो उन्हें जेल भेज दिया। यही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ भी हुआ। वे आइएनडीआइए के सहयोगी हैं और हम उनके साथ हैं।
उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बांड के माध्यम से भाजपा को 8,252 करोड़ और कांग्रेस को 1,950 करोड़ रुपये मिले। 14 प्रकरण ऐसे थे, जिन्हें ईडी, आयकर या सीबीआइ के नाेटिस जारी हुए और भाजपा को चंदा मिला। चार लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट जिन कंपनियों को दिए गए, उन्होंने चार हजार करोड़ रुपये का चंदा दिया। सात दवा निर्माता कंपनियों की जांच चली, उन्होंने भी राशि दी। उधर, कांग्रेस के बैंक खातों में जमा 285 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को आयकर से छूट रहती है। इसके बाद भी पुराने मामले निकालकर नियम विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। स्थिति यह है कि खाते में पैसा होने के बाद भी हम उसका उपयोग चुनाव में नहीं कर सकते हैं। 14 लाख रुपये के नोटिस पर 210 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई है। इतिहास में पहली बार हो रहा है कि मुख्यमंत्रियों को जेल भेजा जा रहा है।





