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राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र के एग्जिट पोल पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल.

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नई दिल्ली। देश के लोकतंत्र के सबसे बढ़े महापर्व लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण के मतदान के बाद शनिवार शाम को न्यूज चैनल्स और एजेंसीज ने अपने-अपने एग्जिट पोल जारी किए। जिसमें एक बार फिर देश में भाजपा की सरकार बनने का अनुमान लगाया है।एग्जिट पोल के अनुसार मध्यप्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी क्लीन स्वीप करते हुए 29 की 29 लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाती हुई नजर आ रही है। जिसे लेकर पूर्व सीएम और राजगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओ को भी नसीहत दी है।

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राजगढ़ लोक सभा क्षेत्र तीन जिलों में फैला हुआ है। इसमें राजगढ़, गुना और आगर मालवा शामिल है। अगर,किसी टीवी चैनल को यहां एग्जिट पोल करना था तो उसे इन तीनों जिलों में अपने लोग भेजने थे। क्या उन्होंने भेजे? राघौगढ़ से लेकर सुसनेर तक एक ही दिन में एक साथ वोट डालकर बाहर आ रहे लोगों से पूछना कि वोट किसे दिया और इससे एग्जिट पोल तैयार करना संभव नहीं। इसके लिए कम से कम 100 लोगों से अधिक की टीम चाहिए।

टीवी चैनलों के एग्जिट पोल्स में राजगढ़ शामिल नहीं है। मेरी अपने सहयोगियों और समर्थकों से अपील है कि मतगणना पर ध्यान रखें, ताकि कोई गड़बड़ी न होने पाए। राजगढ़ में चुनाव आप सबकी कड़ी मेहनत और जनता के समर्थन से लड़ा गया है। बस एक काउंटिंग वाले दिन की मेहनत बाकि है। हमारे मतगणना एजेंट्स से बस एक और अनुरोध है कि जब तक नतीजा घोषित न हो जाए तब तक अपनी टेबल न छोड़ें। हम लड़े हैं और हम जीतेंगे।

गौरतलब है कि देश के न्यूज चैनल्स और अन्य सर्वे एजेंसियों के माध्यम से जिस तरह के एग्जिट पोल सामने आए हैं उससे भाजपा खेमे में खुशी का माहौल है। लेकिन, कांग्रेस उस पर शंकाए जता रही है। कांग्रेस के तमात नेता एग्जिट पोल के नतीजे को नकार रहे हैं। लोकसभा चुनाव के परिणाम चार जून को सामने आएंगे, तब पूरी तरह से साफ हो जाएगा कि कौन कितनी सीटें जीत रहा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।