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मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव के लिए तैयार, भाजपा का भ्रष्टाचार जन-जन को बताएंगे।

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मिली लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारी को लेकर मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी शेष नारायण ओझा ने कहा है कि मैं पहले भी मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस का प्रभारी रहा हूं और मध्य प्रदेश के बारे में बेहतर जानता हूं आने वाले लोकसभा चुनाव में यूथ कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार है। और इस बार परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आएंगे।

मध्य प्रदेश की जनता ने पिछले विधानसभा चुनाव में जो माहौल बनाया था वह कांग्रेस के पक्ष में था। वोटिंग के दिन तक किसी को यह एहसास नहीं था, बल्कि बीजेपी के लोगों को भी एहसास नहीं था कि इन लोगों की सत्ता में वापसी होगी। क्योंकि इन्होंने जैसे काम किए थे। जिस प्रकार से बेरोजगारों के साथ अन्याय हुआ था। किसानों के साथ अन्याय हुआ, वह सारी चीज हर जगह, हर चौराहों पर सुनाई पड़ती थी। जनता भी यह खुद नहीं मान रही की सरकार इनकी वापस कैसे आ गई। प्रदेश की जनता किसी भी प्रकार से अब आगे बीजेपी को नहीं देखना चाहती है।

केंद्र सरकार ने हर वर्ग के साथ वादा खिलाफी की।

मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस प्रभारी शेष नारायण ओझा कहा कि मैं केंद्र सरकार की बात करूं तो युवाओं को रोजगार और किसानों की आय दुगनी होगी, यह वादे आज से नहीं लगातार 10 साल से जनता से किया जा रहे हैं। प्रदेश की जनता इस मुद्दे के आधार पर यह तय करेगी की भविष्य किसका होगा और केंद्र में कौन होगा। हमें भरोसा है कि मध्य प्रदेश की जनता कांग्रेस के साथ खड़ी होगी। यूथ कांग्रेस हर लोकसभा सीट पर विधानसभा से लेकर के बूथ स्तर तक कार्यकर्त्ता से बातचीत कर संपर्क कर उनको मोटिवेट करने का काम कर रहे हैं, और हमें आशा है कि यूथ कांग्रेस की एक मजबूत भूमिका पूरे लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर दिखाई देगी।

मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट।

प्रदेश में हो रहे महिलाओं के साथ अपराध को लेकर यूथ कांग्रेस के प्रभारी ने कहा है कि पुलिस नेताओं की सुरक्षा में लगी हुई है। पुलिस को प्रदेश की जनता से कोई मतलब नहीं है। उसका नतीजा है कि पूरे मध्यप्रदेश में चाहे आदिवासी हों, चाहे महिलाओं हों, आमजन हों लगातार आए दिन अपराध की खबरें आपको सुनने को मिलती हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के आंकड़ों के आधार पर मध्यप्रदेश महिला अपराध में नंबर वन बन चुका है।

इन्वेस्टर्स मीट आयोजन भव्य पर सतह पर शून्य।

शेषनारायण ने कहा कि मैंने इतने सारे इन्वेस्टर्स मीट देख लिए लेकिन कुछ भी ऐसा देखने को नहीं मिला जहां हजार डेढ़ हजार लोगों को नौकरियां मिली हों, यह जनता के पैसे को बर्बाद करने का इवेंट है।
इससे सिर्फ प्रदेश के भाजपा नेताओं को फोटो लगाने का मौका मिलता है। प्रदेश का युवा चाहे पटवारी घोटाला हो, व्यापम घोटाला हो जिस भी नौकरी की आप बात करें सब सामने है किस प्रकार से नर्सिंग विभाग में भर्ती का खेल हुआ है यह घोटाले छुपे नहीं है।

केंद्र की अग्निवीर योजना से युवा निराश।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग का युवा सुबह 4 बजे से सड़कों पर मैदान में दौड़ना शुरू करता था कि आर्मी की भर्ती निकलेगी और उसे नौकरी मिलेगी। केंद्र सरकार ने युवाओं के साथ धोखा किया है। प्रदेश का युवा बेरोजगार है। शिक्षा की स्थिति भी खराब है। कॉलेज के पेपर आउट हो रहे हैं दसवीं के पेपर आउट हो रहे हैं नर्सिंग में क्या घोटाला चल रहा है सबके सामने है।

जो कार्यकर्ता काम करेगा वही पद पर रहेगा।

शेषनारायण ने कार्यकर्ताओं के लिए भी कहा कि जो कार्यकर्ता काम करेगा उसे ही पद रहने दिया जाएगा। पूरी मेहनत के साथ हम यूथ कांग्रेस के लोग हमारी पार्टी के लोग हमारे संगठन के लोग लगे हुए हैं। और निश्चित तौर पर 2024 में बदलाव आपको देखने को मिलेगा। यूथ कांग्रेस के लोग 29 सीटों में से 29 सीटों पर काम करेंगे। लोकसभा चुनाव में हम और अधिक मेहनत करके परिणाम लायेंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।