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राहुल गांधी के खिलाफ बयान पर केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू पर FIR

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयान पर केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। राहुल गांधी ने अमेरिका दौरे पर सिखों को लेकर बयान दिया था, जिस पर रवनीत बिट्टू ने उन्हें आतंकी बता दिया था। इसे लेकर खूब हंगामा हुआ और कर्नाटक में रवनीत बिट्टू के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने बयान पर माफी मांगने से भी इनकार कर दिया है।

कर्नाटक के एक कांग्रेस पदाधिकारी ने केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 (गलत सूचना के आधार पर बयान देना या अफवाह फैलाना), 192 (दंगे कराने के मकसद से भडकाऊ बयान देना), 196 (दो समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने) के तहत बंगलूरू के हाई ग्राउंड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।

राहुल गांधी ने हालिया अमेरिका दौरे पर एक कार्यक्रम के दौरान अपने एक बयान में कहा था कि ‘लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या भारत में एक सिख को अपनी पगड़ी या कड़ा पहनने की अनुमति दी जाएगी। या वह एक सिख के रूप में, गुरुद्वारा जाने में सक्षम होगा। यहीं लड़ाई है और यह सभी धर्मों के लिए है।’ राहुल गांधी के इस बयान का समर्थन खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भी किया था। पन्नू ने कहा था कि ‘राहुल गांधी का बयान तथ्यात्मक रूप से सच्चा है। उन्होंने माना कि भारत में सिखों के अस्तित्व को खतरा है। यह बयान खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।’

रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला था
राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि ‘राहुल गांधी ने सिखों को बांटने का प्रयास किया है। सिख किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है, मगर चिंगारी लगाने की कोशिश हो रही है। राहुल गांधी देश के नंबर एक आतंकी हैं। जो लोग हर वक्त मारने और जहाजों-ट्रेनों को उड़ाने की बात करते हैं, वे राहुल गांधी के समर्थन में आ गए हैं। मेरे ख्याल से अगर किसी को पकड़ने के लिए इनाम होना चाहिए तो वो राहुल गांधी हैं।’ रवनीत बिट्टू ने कहा कि ‘राहुल गांधी में गंभीरता नहीं है। राहुल गांधी या उनकी पार्टी के नेता देश को तोड़ने में लगे हैं। कांग्रेस को देश की सुरक्षा और करोड़ों जनता के हितों की चिंता नहीं है। सिर्फ वोट के लिए कांग्रेस समाज में अशांति फैलाने में लगी है।’

वहीं जब रवनीत बिट्टू से मीडिया द्वारा पूछा गया कि क्या उन्हें राहुल गांधी के खिलाफ दिए गए अपने बयान पर खेद है? तो रवनीत बिट्टू ने कहा कि ‘मुझे खेद क्यों होगा? हमने पंजाब में पूरी एक पीढ़ी को खो दिया। गांधी परिवार ने पंजाब को जलाया। मेरा दर्द बतौर एक सिख है। मैं मंत्री बाद में हूं , लेकिन एक सिख पहले हूं। अगर पन्नू राहुल गांधी के बयान का समर्थन करता है तो अब क्या कह सकते हैं?’ केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि ‘खरगे साहब को माफी मांगनी चाहिए। पहले उन्हें साफ करना चाहिए कि क्या उन्हें लगता है कि सिखों को कहीं जाने की इजाजत नहीं है, जैसा कि राहुल गांधी ने कहा है।’

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।