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पूर्व मुख्यमंत्री ने संभाला मध्यप्रदेश में राहुल की यात्रा का जिम्मा

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के दलबदल की अटकलों पर भले ही विराम लग गया हो, पर कांग्रेस संगठन के भीतर उनकी विश्वसनीयता अवश्य प्रभावित हुई है। यह पूरा घटनाक्रम तब हुआ, जब कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा मध्य प्रदेश में आने वाली है।

कमलनाथ समर्थकों की बेरुखी का असर यात्रा पर न पड़े, इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी हाईकमान ने अब राहुल की यात्रा की मध्य प्रदेश की बागडोर उनको सौंप दी है। वह राजगढ़ व गुना के बाद तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बुधवार को ग्वालियर और मुरैना पहुंचे।

बता दें कि यात्रा राजस्थान के धौलपुर से मध्य प्रदेश में दो मार्च को प्रवेश करेगी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कमलनाथ प्रदेश की राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं। मई, 2018 से बीते साल दिसंबर तक वह पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रहे। सभी बड़े कार्यक्रमों में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की भागीदारी दिखती थी, लेकिन भारत जोड़ो न्याय यात्रा पहला अवसर है, जब दिग्विजय सिंह सारी जिम्मेदारी उठाए हैं।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के लिए प्रदेश कांग्रेस ने जो समितियां बनाई हैं, प्रत्यक्ष तौर पर उनकी बैठकों में भी कमलनाथ कभी शामिल नहीं हुए। कुछ दिनों से उनके दलबदल की अटकलें भी तेज हुईं, जिससे न्याय यात्रा की तैयारियां पीछे छूट गईं और सभी नेता संभावनाओं को टटोलने, विधायक और पदाधिकारियों से संपर्क साधने में जुट गए। कमलनाथ ने आगे बढ़कर अटकलों को थामने के लिए स्वयं कोई पहल भी नहीं की। इससे निश्चित तौर पर उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई। हालांकि, मंगलवार को यात्रा की तैयारी को लेकर हुई बैठक में कमलनाथ भी वर्चुअली शामिल हुए और कहा कि मैं यात्रा में शामिल रहूंगा।

यात्रा को सफल बनाने के लिए दिग्विजय सिंह लगातार कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी उनके ही समर्थक माने जाते हैं और उनके प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद पार्टी संगठन का यह पहला बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है, इसलिए भी उनकी सक्रियता अधिक है। जीतू पटवारी यात्रा मार्ग में आने वाले जिलों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। यात्रा दिग्विजय सिंह के प्रभाव वाले और गृह क्षेत्र राघौगढ़ से गुजरेगी। राघौगढ़ से उनके पुत्र जयवर्धन सिंह विधायक हैं। यहां राहुल गांधी का रोड शो भी होगा।

दिग्विजय सिंह की नजर लोकसभा चुनाव पर भी है। राजगढ़ से प्रियव्रत सिंह को चुनाव लड़ाया जा सकता है। उनका विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर इसमें आता है। हालांकि, वह विधानसभा चुनाव हार गए थे। उनका नाम दावेदारों की सूची में है। राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में ही राघौगढ़ भी आता है। गुना लोकसभा क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव क्षेत्र है, इसलिए इस क्षेत्र में भी दिग्विजय सिंह विशेष रुचि दिखा रहे हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।