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हिमाचल प्रदेश के टूरिज्म पर पूरा फोकस, धौलाधार तक टूरिस्ट को पहुंचाने का काम करेंगे पूरा – डॉ राजीव

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नई दिल्ली। कहते हैं सियासत की डगर आसान नहीं होती और खास तौर से तब, जब चुनाव हों। चुनावी समर में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने में जुटे हैं। हिमाचल प्रदेश में 1 जून को मतदान होना है और यहां की कांगड़ा चंबा सीट से कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है तो वहीं भाजपा की तरफ से डॉ राजीव भारद्वाज को चुनावी मैदान में उतर गया है। हमने बात की भाजपा के प्रत्याशी डॉ राजीव भारद्वाज से… आईए आपको बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा।

भाजपा प्रत्याशी डॉ राजीव भारद्वाज ने कहा है नरेंद्र मोदी हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं। पिछले 10 वर्षों से इस देश की कमान उनके हाथों में है। और 10 वर्षों का जो नरेंद्र मोदी जी का कार्यकाल है, 10 वर्षों में जो काम उन्होंने जनमानस लिए किए हैं। उनको जनता के बीच में लेकर जा रहे हैं, और आने वाले अगले 25 वर्षों में क्या योजना है। इस देश के लिए, इस प्रदेश के लिए, हमारी पार्लियामेंट्री के लिए। इसे लेकर हम जनमानस के बीच में जा रहे हैं और यही हमारा मुद्दा है और इस पर ही हम बात कर रहे हैं। और जहां तक हम इश्यूज की बात करें हिमाचल प्रदेश कांगड़ा चंबा लोकसभा क्षेत्र बड़ा खूबसूरत स्थान है यह पूरा का पूरा टूरिज्म की दृष्टि से इसको एक्सप्लोर करने की कोशिश की जाएगी। इस पार्लियामेंट्री में धौलाधार तक टूरिस्ट को कैसे पहुंचना है इसके लिए कोशिश की जाएगी। कांगड़ा चंबा की जो हमारी रेलवे लाइन है उसको आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी और संभावनाओं को एक्सप्लोर किया जाएगा। नेरोगेज लाइन को ब्रॉड ग्रेज कैसे किया जा सकता है। इन सब महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया जाएगा।

भाजपा प्रत्याशी डॉ राजीव भारद्वाज ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस वाले क्या कहेंगे, उनके पास कहने के लिए बचा ही क्या है। मैं इस कांगड़ा चंबा पूरी पार्लियामेंट्री में पिछले डेढ़ महीने से घूम रहा हूं कांग्रेस के प्रत्याशी तो अभी तैयार भी नहीं हुए हैं। देश और प्रदेश के जनमानस ने, इस पार्लियामेंट्री के जनमानस ने निर्णय कर लिया है बिल्कुल उनके मन में है कि नरेंद्र मोदी को फिर से देश का प्रधानमंत्री बनना है। हमारे कार्यकर्ता काम में लगे हैं, पूरे जोश के साथ लगे हैं। कांग्रेस के नेताओं के पास बोलने के लिए कुछ नहीं है। देश में केवल एक गारंटी चलती है। वह है केवल मोदी की गारंटी मोदी की गारंटी का मतलब, हर गारंटी का पूरा होना। कांग्रेस की गारंटी का क्या हाल है यह सब जानते ही हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।