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हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को बताया तानाशाह, इस से की तुलना

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नई दिल्ली। मुंबई युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जीशान सिद्दीकी के दावे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से की। सीएम सरमा ने कहा कि मुझे लगता है कि अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से ऐसी बेकार की मांगें सिर्फ एक ही आदमी कर सकता है कि उन्हें अच्छा फोटोजैनिक लगना चाहिए। वह है उत्तर कोरिया पर शासन करने वाला।

गौरतलब है कि गुरुवार को कांग्रेस नेता जीशान सिद्दीकी ने दावा किया था कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मैं नांदेड़ में राहुल गांधी से मिलना चाहता था, लेकिन राहुल गांधी के करीबी एक व्यक्ति ने कहा पहले 10 किलो वजन करो फिर राहुल गांधी से मिलवाऊंगा। उन्होंने कहा कि मैं आपका विधायक हूं, मुंबई युवा कांग्रेस का प्रमुख हूं और आप मेरी बाडी शेमिंग कर रहे हैं? इस दौरान उन्होंने संकेत दे दिए हैं कि वह कांग्रेस छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में जैसा बर्ताव हो रहा है, उससे साफ है कि पार्टी को अल्पसंख्यकों की जरूरत नहीं है। तो अब हमें अपने विकल्प देखने पड़ेंगे।

जीशान ने कहा कि कांग्रेस खुद को अल्पसंख्यकों का अन्नदाता बताती है। लेकिन अब उसे यह ढोंग बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा कहती है कि हम हमेशा मुस्लिम समाज के साथ हैं। अल्पसंख्यकों के साथ हैं। लेकिन जितनी सांप्रदायिकता कांग्रेस पार्टी के अंदर है, उतनी कहीं नहीं है। जीशान ने राहुल गांधी की टीम पर निशाना साधते हुए कहा था कि राहुल की टीम के लोगों ने ही पार्टी को खत्म करने की सुपारी ले रखी है।

राहुल गांधी की टीम में सब भ्रष्टाचारी भरे हुए हैं। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को पिता समान बताते हुए कहा कि लेकिन उनके हाथ बंधे हुए हैं। जीशान ने कहा कि मुझे किसी व्यक्ति विशेष से नाराजगी नहीं है। मुझे संगठन से नाराजगी है। पार्टी में मुझे सुननेवाला कोई नहीं है।

इंटरनेट मीडिया के अनुसार, असम सरकार ने समान नागरिक कानून की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने मुस्लिम विवाह और तलाक अधिनियम 1930 को खत्म करने का फैसला लिया। शुक्रवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद अब सभी शादियां स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की जाएंगी। सरकार के अनुसार, बाल विवाह को रोकने के मकसद से सरकार ने ये कदम उठाया है।

हिमंत बिस्वा सरमा की कैबिनेट ने फैसला लिया है कि मुस्लिम विवाह और तलाक अधिनियम के मामलों से जुड़े 94 लोगों को एकमुश्त दो लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। असम सरकार ने बहुविवाह रोकने के लिए कानून बनाने की तैयारी काफी पहले से कर ली थी। राज्य सरकार ने इसके लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज वाली एक विशेष समिति बनाई थी। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लाम में मुस्लिम पुरुषों की चार महिलाओं से शादी परंपरा अनिवार्य नहीं है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।