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जीतू पटवारी बोले- बिल्कुल उम्मीद है कि जल्द ही टिकट तय हो जाएगा

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इंदौर। लोकसभा चुनाव के महासमर में इंदौर से लोकसभा प्रत्याशी का नाम घोषित कर भाजपा चुनावी दौड़ में अब तक आगे है। कांग्रेस में नजारा बीते चुनाव से बिल्कुल अलग है।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का गृह क्षेत्र होते हुए भी टिकट तो दूर, दावेदारों के नाम तक हवा में नहीं तैर रहे। लगातार दलबदल और टूटते संगठन के बीच प्रदेश अध्यक्ष पटवारी के लिए यह चुनौती है कि इंदौर लोकसभा क्षेत्र से किसी अच्छे उम्मीदवार का नाम घोषित करवा सकें। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार यानी 19 मार्च को कांग्रेस इंदौर का टिकट घोषित कर सकती है।

दो सप्ताह में इंदौर लोकसभा क्षेत्र से दो-तीन पूर्व विधायकों के साथ तमाम कांग्रेसी पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए कद्दावर उम्मीदवार को मैदान में उतारना और हतोत्साहित कार्यकर्ताओं में जोश जगाना भी बड़ी चुनौती है। कई कार्यकर्ता और नेता भी खुद पटवारी के इंदौर से चुनाव लड़ने की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। 18 मार्च को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की बैठक होना है। बैठक में उम्मीदवारों की अगली सूची पर मोहर लगेगी।

इंदौर का नाम भी तय हो सकता है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस बढ़े नाम के बजाय किसी युवा और नए नाम की तलाश में जुटी है। इंदौर से किसी महिला उम्मीदवार का नाम भी तय किया जा सकता है। दरअसल भाजपा की ओर से पहले कयास लगाए गए थे कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को अमल करने की दिशा में मप्र में 9 से 10 सीटों पर महिला उम्मीदवार दिए जा सकते हैं। उसमें इंदौर के भी होने की उम्मीद थी। हालांकि भाजपा ने महिला उम्मीदवार नहीं दिया ऐसे में कांग्रेस अब इस दिशा में आगे बढ़ सकती है। दरअसल कई पुराने चेहरे जो बीते वर्षों में चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने इंदौर से उम्मीदवार बनने से ही इन्कार कर दिया है।
पटवारी बोले- पार्टी का आदेश मानूंगा

इंदौर लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार के नाम की घोषणा अगली सूची में होगी। इस पर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि बिल्कुल उम्मीद है कि जल्द ही टिकट तय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाएगी जो समर्पित कार्यकर्ता हो और लोगों के बीच सक्रिय भी हो। खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर पटवारी ने कहा कि पार्टी का जो आदेश होगा उसे मैं मानूंगा ही। जहां जरूरत होगी, पार्टी के लिए खड़ा हूं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।