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खरगे बोले- कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हमने कांग्रेस घोषणापत्र पर गहन विचार-विमर्श किया

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नई दिल्ली। दिल्ली में कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में CWC की मीटिंग हुई। कांग्रेस की मीटिंग में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए चुनावी घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) पर चर्चा हुई। बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी मौजूद रहे। बैठक के बाद खरगे ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में हमने कांग्रेस घोषणापत्र पर गहन विचार-विमर्श किया। मेनिफेस्टो कमेटी ने पहले ही ड्राफ्ट CWC को मंजूरी के लिए भेज दिया था। मीटिंग के दौरान अध्यक्ष खरगे ने मौजूद नेताओं से कहा कि वे कार्यकर्ताओं से मेनिफेस्टो में शामिल हर मुद्दे को देश के हर गांव और घर तक पहुंचाएं।

कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी (कांग्रेस) सिर्फ ‘घोषणा पत्र’ ही नहीं बल्कि ‘न्याय पत्र’ भी जारी करेगी ताकि लोगों को उज्ज्वल भविष्य दिखे।

वहीं, दूसरी ओर, के सी वेणुगोपाल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी ने पार्टी की गारंटी को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए रोडमैप तैयार किया है।

के सी वेणुगोपाल ने आगे कहा कि सीडब्ल्यूसी ने कांग्रेस अध्यक्ष को लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के घोषणापत्र को अंतिम मंजूरी देने, इसे जारी करने की तारीख तय कर ली है।
कांग्रेस महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि आज हमारी जो बैठक हुई वह सिर्फ हमारे घोषणापत्र के लिए नहीं बल्कि हमारे ‘न्याय पत्र’ के लिए थी। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से तैयार है। आज की बैठक में हमारे एजेंडे पर चर्चा हुई। पिछले 63 दिनों से राहुल गांधी हमारे 5 न्याय की बात कर रहे हैं और 25 गारंटी की घोषणा की है। यह सिर्फ एक साधारण घोषणा पत्र नहीं है बल्कि एक महत्वपूर्ण ‘न्याय पत्र’ है ताकि हमारे देश के लोग बेहतर भविष्य देख सकें।

कांग्रेस महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि आज हमारी जो बैठक हुई वह सिर्फ हमारे घोषणापत्र के लिए नहीं बल्कि हमारे ‘न्याय पत्र’ के लिए थी। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से तैयार है। आज की बैठक में हमारे एजेंडे पर चर्चा हुई। पिछले 63 दिनों से राहुल गांधी हमारे 5 न्याय की बात कर रहे हैं और 25 गारंटी की घोषणा की है। यह सिर्फ एक साधारण घोषणा पत्र नहीं है बल्कि एक महत्वपूर्ण ‘न्याय पत्र’ है ताकि हमारे देश के लोग बेहतर भविष्य देख सकें

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।