नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनावों में, सभी बड़े और छोटे राजनीतिक दल जीत हासिल करने के लिए जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। इसी कड़ी में, बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपनी कमर कस ली है। हाल ही में बसपा की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद, यह फैसला लिया गया कि पार्टी के कार्यकर्ता अब घर-घर जाकर प्रचार करेंगे। इस अभियान के तहत, मायावती के चार बार के मुख्यमंत्री कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने ‘प्लान बुकलेट’ तैयार की है, जिसमें उस समय की सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण होगा। जल्द ही, कार्यकर्ता इन बुकलेट्स को घर-घर वितरित करेंगे।
पिछले कुछ चुनावों में बसपा का प्रदर्शन खराब रहा है, जिससे पार्टी चिंतित है। हाल के लोकसभा चुनावों में निराशाजनक परिणामों ने पार्टी को अपनी रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। अब पार्टी ने फैसला किया है कि वह अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी। वरिष्ठ बसपा नेता बताते हैं कि पुराने स्वरूप का मतलब है मायावती की उस छवि को वापस लाना जिसमें वह एक सख्त नेता के रूप में जानी जाती थीं और अपने समाज के महापुरुषों को सम्मान देती थीं। बसपा अब नए और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए उसी छवि पर जोर देगी। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे बसपा के चार कार्यकाल की महत्वपूर्ण योजनाओं और उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाएं।
बसपा की योजना के तहत, उनके शासनकाल में किए गए कामों को एक बुकलेट में संकलित किया गया है। लाखों की संख्या में छपवाई गई इन बुकलेट्स को घर-घर पहुंचाने की विस्तृत योजना बनाई जा चुकी है। हाल ही में हुई पार्टी बैठक में, मायावती ने जनसंपर्क अभियान के माध्यम से इन बुकलेट्स को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। एक पार्टी नेता ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों, जहां बसपा का समर्थन है, वहां इन बुकलेट्स को वितरित किया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी को मायावती के कार्यकाल के कार्यों की जानकारी मिल सके। पार्टी ने इसके लिए विशेष बैठकों का आयोजन करने का निर्णय लिया है, जिनमें ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और बुकलेट्स को वितरित किया जाएगा।
दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा के मुख्य चुनाव और उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में हिस्सा ले रही हैं। मायावती इन चुनावों को अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने का बड़ा अवसर मानती हैं। इसी कारण, उन्होंने अपनी सरकार की योजनाओं को ‘प्लान बुकलेट’ के माध्यम से प्रचारित करने की योजना बनाई है। मायावती के कार्यकाल में, ओबीसी और दलित महापुरुषों की प्रतिमाएं लगवाई गईं, कई शहरों और संस्थाओं का नामकरण उन महापुरुषों के नाम पर किया गया, और बड़े-बड़े स्मारक बनवाए गए थे। बसपा चाहती है कि इन उपलब्धियों के साथ-साथ मायावती की सख्त छवि और उनके शासनकाल की कानून व्यवस्था को भी आज के युवा मतदाताओं के सामने लाया जाए, ताकि वे पार्टी से जुड़ सकें।





