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मल्लिकार्जुन खरगे बोले- मैं नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं हूं मैं मोदी और आरएसएस की विचाराधारा के खिलाफ हूं

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नई दिल्ली। हरियाणा के यमुनानगर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा में कुछ महिलाएं स्वाति मालीवाला के फोटो वाले पोस्टर लेकर पहुंच गईं। महिलाओं ने दो बार खरगे को स्वाति मालीवाला के पोस्टर दिखाते हुए नारेबाजी की। महिलाएं जो पोस्टर लेकर पहुंचीं थीं उन पर लिखा था कि देश की बेटी स्वाति मालीवाला पर अत्याचार, कांग्रेस चुप क्यों है? देश मांग रहा है जवाब, महिला विरोधी सरकार नहीं चाहिए, स्वाति मालीवाल को न्याय दो, न्याय दो। हंगामा कर रही महिलाओं को पुलिस ने रैली स्थल से बाहर कर दिया। मल्लिकार्जुन खरगे मंगलवार को नई अनाज मंडी जगाधरी में अंबाला लोकसभा सीटी से कांग्रेस प्रत्याशी वरूण मुलाना व कुरुक्षेत्र लोकसभा से इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. सुशील गुप्ता के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे।

विरोध कर रही महिलाओं ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर में देश की बेटी व राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट होती है। जो सरकार महिलाओं पर अत्याचार करती है आज कांग्रेस उसी का साथ दे रही है। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी सुशील गुप्ता के लिए कांग्रेस चुनाव प्रचार कर रही है। एक बार तो पुलिस ने उनके हाथ से स्वाति मालीवाल के पोस्टर लेकर फाड़ दिए थे। इसके बाद वह दोबारा जनसभा में सबसे आगे पहुंच गईं।

मल्लिकार्जुन खरगे ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं हूं। मैं मोदी और आरएसएस की विचाराधारा के खिलाफ हूं। हम विचारधारा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। मोदी खुद को होशियार समझते हैं। परंतु मोदी से ज्यादा देश की जनता होशियार है। यह लड़ाई जनता और नरेंद्र मोदी व भाजपा के बीच है। मल्लिकार्जुन खरगे ने नरेंद्र मोदी को झूठों का सरदार भी कहा। पहले मोदी कहते थे कि कांग्रेस ने 70 साल में देश के लिए किया क्या है? अब कहते हैं कि कांग्रेस ने 55 साल में क्या किया है। नरेंद्र मोदी भूल गए कि कांग्रेस की बनाई हुई नीतियों के कारण ही वह आज प्रधानमंत्री बने हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि नरेंद्र मोदी नारा देते हैं कि सबका साथ-सबका विकास। सबका साथ लेकर मोदी ने सबका सत्यानाश कर दिया। मोदी देश के किसानों पर कभी कुछ नहीं बोलते। कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र को मोदी मुस्लिम लीग का घोषणा पत्र बताते हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेस सरकार बनी तो लोगों का हक मुसलमानों को दें देंगे। मोदी को पढ़ना नहीं आता है। वह बताएं की कांग्रेस के घोषणा पत्र में यह सब कहां लिखा है। ऐसे ऊंचे पद पर बैठ कर भी वह झूठ बोलते हैं।

कांग्रेस ने घोषणा पत्र सभी वर्गों को ध्यान में रख कर बनाया है। खरगे ने कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ी है। केंद्र सरकार में ही 30 लाख पद खाली पड़े हैं। वहीं हरियाणा में एक लाख 82 हजार पद खाली हैं। भाजपा ने इन पदों को इसलिए खाली छोड़ा हुआ है क्योंकि दलितों, पिछड़ों व आदिवासियों को उनका हक देना पड़ेगा। उन्होंने गठबंधन की सरकार बनने पर देश में अग्निवीर योजना को बंद करने की बात भी कही।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।