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मुंबई में राहुल गांधी-विपक्ष की मेगा रैली

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव शुरू होने में करीब एक महीना बचा है। ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी मणिपुर से मुंबई तक 6,700 किलोमीटर से ज्यादा की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की। अब आज सुबह राहुल गांधी मुंबई में मणि भवन से अगस्त क्रांति मैदान तक न्याय संकल्प पदयात्रा करेंगे। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया शक्ति प्रदर्शन के लिए एक रैली करेगा।कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन मुंबई के शिवाजी पार्क में रविवार को एक मेगा रैली आयोजित करने के लिए तैयार है। इस रैली में इंडिया गठबंधन के कई बड़े नेता शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की समापन रैली में भाग लेंगे।

राहुल गांधी ने 14 जनवरी को मणिपुर से न्याय यात्रा शुरू की थी। राहुल भारत के 15 राज्यों, 110 जिलों, 100 लोकसभा सीटों और 337 विधानसभा से होते हुए मुंबई पहुंचे। यात्रा के दौरान राहुल गांधी करीब 6700 किमी का सफर तय किया। हालांकि, इस बार उन्होंने बस और पैदल दोनों तरीके से यात्रा की है।

यह नेता भी रहेंगे मौजूद

झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन
आप नेता सौरभ भारद्वाज
भाकपा महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य
नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला
भारत जोड़ो न्याय यात्रा का समापन
राहुल गांधी ने शनिवार को मध्य मुंबई में डॉ. बीआर आंबेडकर के स्मारक चैत्यभूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करके और संविधान की प्रस्तावना पढ़कर अपनी 63 दिवसीय भारत जोड़ो न्याय यात्रा का समापन किया। राहुल के साथ उनकी बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी थीं। इससे पहले, धारावी क्षेत्र में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए राहुल ने जाति गणना के कांग्रेस के वादे को दोहराया और कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में लौटी तो गरीब महिलाओं को उनके बैंक खातों में हर साल एक लाख रुपये मिलेंगे।

इंडिया ब्लॉक की प्रमुख रैली से पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी रविवार को मणिभवन से अगस्त क्रांति मैदान तक ‘न्याय संकल्प पदयात्रा’ करेंगे। गांधी अगस्त क्रांति मैदान के पास तेजपाल हॉल में बातचीत भी करेंगे। बता दें, कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को तेजपाल हॉल में हुई थी।

आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मतदान 19 अप्रैल से शुरू होकर 1 जून तक सात चरणों में होगा। वोटों की गिनती चार जून को होगी। महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक की रैली ऐसे समय में हो रही है जब राज्य के कई पार्टी नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिनमें सबसे प्रमुख महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण हैं। चव्हाण 13 फरवरी को मुंबई में भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले बुधवार को मुंबई में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और पार्टी नेता अशोक चव्हाण की मौजूदगी में पार्टी के वरिष्ठ नेता पदमाकर वलवी भी भाजपा में शामिल हो गए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।