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पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट में घायल हुए लोगो से मिले MP कांग्रेस चीफ जीतू पटवारी

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जीतू पटवारी ने कहा हरदा हादसे को लेकर शासन प्रशासन के आँकड़ों और ब्लॉस्ट का शिकार हुए लोगों के परिजनों की जानकारी में ज़मीन आसमान का अंतर है। लेकिन सरकार सच्चाई सामने लाकर दोषियों पर कार्यवाही के बजाएँ इस खौफनाक मंजर में भी लापरवाही बरत रही है।

एमपी पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को टैग करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ने बोला है कि दोषियों पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी, जो याद रहे, किसी को नहीं छोड़ेंगे। सीएम मोहन यादव जी आपकी सुविधा के लिए पब्लिक डोमेन में आई कुछ गड़बड़ियां साझा कर रहा हूं। उम्मीद करता हूं कि “निष्पक्ष” जांच में इन्हें भी पूरी ईमानदारी से, एक बार फिर शामिल किया जाएगा. जीतू पटवारी ने लिखा है कि-

  • पटाखा निर्माण परिसर के स्वीकृत नक्शे या ड्राइंग की जानकारी से जुड़े दस्तावेज अनिवार्य रूप से मौके पर होने चाहिए थे।
  • सच्चाई : जांच टीम ने पाया कि परिसर के स्वीकृत नक्शे और ड्राइंग नहीं थी।
  • शर्तों के अनुसार आतिशबाजी बारूद का विनिर्माण एक मंजिल भवन के भीतर किया जाना चाहिए और भवन के सभी दरवाजे बाहर की ओर खुलने चाहिए थे।
  • सच्चाई : जांच टीम ने पाया कि दो मंजिला भवन निर्मित था. बिल्डिंग में प्रथम तल पर पटाखा निर्माण और उसी भवन में पटाखे और उसका सामान रखा पाया गया।
  • शर्त ये है कि विस्फोटक ऐसे एक मंजिला हल्के सन्निर्मित कमरे में बनाए जाएंगे जो केवल ऐसे विनिर्माण के प्रयोजन के लिए रखे गए हैं और जो भंडारण स्थान से 45 मीटर की दूर पर हो।
  • सच्चाई : जांच टीम ने पाया पटाखा निर्माण परिसर में मैन्युफैक्चरिंग संबंधित व्यवस्थाएं, कमरे की व्यवस्था और स्टोरेज एक ही बिल्डिंग में हो रहा था।
  • एक समय में संपूर्ण कारखाने में विस्फोटकों की अधिकतम मात्रा एलई-1 में उल्लेखित से अधिक नहीं होगी।
  • सच्चाई : जांच टीम ने पाया कि मौके पर करीब 7 लाख 35000 नग सुतली बम, अन्य प्रकार के पटाखे पाए गए। यह 15 किलोग्राम की तय मात्रा से कई गुना अधिक मैन्युफैक्चरिंग कर तैयार किए जा रहे थे।
  • कम से कम 15 सेमी से अधिक गहरी सीमेंट की ट्रोजिमा या ट्रफ को या भंडारघर के प्रत्येक प्रवेश में लगाया जाएगा. ऐसे ट्रोजिमा में स्वच्छ जल भरा जाएगा। कोई व्यक्ति ऐसी ट्रोजिमा में बगैर पैर डुबोए प्रवेश नहीं करेगा।

जीतू पटवारी ने कहा कि हरदा में खौफनाक मंजर के बाद शासन-प्रशासन के इस रवैये से मन आहत है। उनकी यह उदासीनता शर्मनाक है। पटवारी ने कहा- आज हरदा पहुँचकर शासकीय अस्पताल में उपचाररत लोगों से उनकी कुशलक्षेमी जानी। सभी परिवारजनों की वेदना असहनीय है। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि सभी को स्वास्थ लाभ प्रदान करें।

जीतू पटवारी ने बुधवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट पर सीएम मोहन यादव को टैग करते हुए लिखा है कि हरदा-हादसे के बाद शुरू हुआ राहत और बचाव कार्य मौत के नए आंकड़ों को सामने ला रहा है। आपसे अनुरोध है, पीड़ित और प्रभावितों को अब ऐसी राहत मिले, जो मिसाल के रूप में लंबे समय तक याद रखी जाए। बेकसूरों के साथ फिलहाल यही इंसाफ किया जा सकता है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।