आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा के वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं पीजीटी (अंग्रेज़ी) तुषार गोयल का मानना है कि आज के दौर में शिक्षक केवल विषय पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। करीब 12 वर्षों के शिक्षण अनुभव के साथ उन्होंने हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सोशल मीडिया के दौर में शिक्षा की जिम्मेदारियां पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे समय में शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक संवाद ही बेहतर भविष्य की नींव रख सकता है।
वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं पीजीटी (अंग्रेज़ी) तुषार गोयल का कहना है कि उन्होंने शिक्षण को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का माध्यम मानकर चुना। उनका मानना है कि आज समाज में बढ़ती नकारात्मक घटनाओं के बीच शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। एक शिक्षक बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना भी विकसित करता है। तुषार गोयल का कहना है कि आर्थिक सफलता महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि शिक्षा के माध्यम से समाज और देश के भविष्य को बेहतर बनाया जा सके, तो उससे बड़ा योगदान कोई नहीं हो सकता।
अंग्रेज़ी विषय को लेकर उन्होंने कहा कि यह आज केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी है। दुनिया के किसी भी देश में शिक्षा, रोजगार या पेशेवर अवसरों के लिए अंग्रेज़ी का ज्ञान व्यक्ति को नई संभावनाएं प्रदान करता है। पिछले 12 वर्षों में शिक्षा प्रणाली में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले शिक्षक ही ज्ञान का प्रमुख स्रोत होते थे, जबकि आज के विद्यार्थी एआई, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर अपने शिक्षकों से भी सवाल पूछते हैं। उनके अनुसार यह बदलाव सकारात्मक है, क्योंकि इससे विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तार्किक सोच और सीखने की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई और सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग विद्यार्थियों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है, बशर्ते उसका उपयोग सीखने और ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से किया जाए।
आईईएलटीएस और टोफेल जैसी अंतरराष्ट्रीय अंग्रेज़ी परीक्षाओं के प्रशिक्षक रहे तुषार गोयल ने कहा कि विदेश में उच्च शिक्षा, रोजगार और इमिग्रेशन के लिए अंग्रेज़ी दक्षता अब अनिवार्य बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। उनका मानना है कि आज अधिक से अधिक भारतीय परिवार अपने बच्चों को वैश्विक अवसर देना चाहते हैं, इसलिए अंग्रेज़ी शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। अंत में उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की कि वे कभी भी बच्चों का मनोबल न तोड़ें। उनके शब्दों में, “हर बच्चे को यह विश्वास दिलाइए कि वह सब कुछ कर सकता है। यदि शिक्षक और अभिभावक मिलकर सकारात्मक वातावरण तैयार करें, तो हर विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।”





