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पटवारी बोले- MP की कानून व्यवस्था सबसे निचले स्तर पर

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी बुधवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि छिंदवाड़ा के बोदल कछार गांव में एक युवक के द्वारा अपने परिवार के ही आठ लोगों की हत्या कर फांसी लगाने की घटना दुखद है। आरोपी ने सबसे पहले पत्नी को कुल्हाड़ी से काटा, फिर एक-एक कर मां, बहन, भाई, भाभी, भतीजे और भतीजियों को मार डाला, जंगलराज की सभी पराकाष्ठा को पार कर चुका मध्यप्रदेश कानून व्यवस्था के सबसे निचले स्तर पर आ चुका है। गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी ने बड़ी संख्या में परिवारों को तनाव और अवसाद में धकेल दिया है। जीतू ने बताया कि प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विधायकों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर व्यवस्थाएं सुधारने का सुझाव देंगे।

पटवारी ने कहा कि महंगाई ने ग्रामीण इलाकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। दिखावे की तमाम सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों में ही गरीबी दूर करने का दावा कर रही हैं तथा जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। एनसीआरबी के साल 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश आत्महत्याओं के मामले में देश भर में तीसरे स्थान पर रहा था। कुल 14 हजार 965 लोगों ने उस साल आत्महत्या की थी, जो देश में सामने आए आत्महत्या के कुल मामलों का 9.1 प्रतिशत था, आत्महत्या की दर (17.8) राष्ट्रीय औसत (12) से भी अधिक थी।
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पटवारी ने कहा, हम दो महीने की घटनाओं को लेकर एक व्हाइट पेपर बनाएंगे। इसको कैसे सुधारे, कांग्रेस पार्टी वो सुझाव देगी। हम उन लोगों में से नहीं हैं कि केवल रोज आरोप लगाना। मैंने जब भी कोई बात मुख्यमंत्री से कही तो सुझाव के साथ की। कभी नफरत और घृणा के साथ नहीं की। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने पूर्व में आनंद विभाग खोलने की नौटंकी करके उसमें कई अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। लेकिन इसकी असफलता का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के लोगों को आनंद की अनुभूति तो हुई नहीं, उलटा आत्महत्याओं का ग्राफ बढ़ा है।

विभाग के गठन के समय राज्य का हैप्पीनेस इंडेक्स जारी करने को इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य बताया गया था तथा आईआईटी खड़गपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने सरकारी खर्च पर भूटान के दौरे भी किए थे। लेकिन तब से अब तक नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है। सरकार को इस बात का चिंतन जरूर करना चाहिए कि क्या यही है, नरेंद्र मोदी जी का खुशहाल भारत या न्यू इंडिया है, जिसमें सिर्फ तनाव और हताशा का माहौल है। जहां रिश्ते हत्या तक सीमित हो गए हैं, उम्मीद है मोहन यादव सरकार घटना की त्वरित जांच करेगी।

पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सागर दौरे को लेकर कहा कि आंसुओं का सागर सूख जाने के बाद उनका जाना निर्रथक है, मौत का खूनी खेल खत्म होने के बाद उनका जाना निर्रथक है, निर्दोषों की चिताएं जब बुझ गईं, तब उनका जाना निर्रथक है। एक ही परिवार की कई पीढ़ियां जब पंचतत्वों में में विलीन हो गईं, तब उनका जाना निर्रथक है। असहनीय दुख की इस घड़ी में पीड़ितों के घाव पर मरहम लगाने की बजाय मुख्यमंत्री विपक्ष के रूप में कांग्रेस की असहमति पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यदि सरकार इमानदारी से अपना काम करे तो विपक्ष को बोलने का ही अवसर नहीं मिले, चूंकि ऐसा होता नहीं, इसीलिए सरकार से लड़ना पड़ता है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।