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तमिलनाडु में विपक्ष पर जमकर बरसे पीएम मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दक्षिण भारत के दौरे पर हैं। पीएम मोदी और भाजपा का फोकस दक्षिण की करीब 129 लोकसभा सीटों पर है। इस कड़ी में आज पीएम मोदी तमिलनाडु पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज कन्याकुमारी से देश के इस दक्षिणी छोर से जो लहर उठी है ये लहर बहुत दूर तक जाने वाली है।

पीएम मोदी ने कहा आज कन्याकुमारी से देश के इस दक्षिणी छोर से जो लहर उठी है ये लहर बहुत दूर तक जाने वाली है। मैं 1991 में एकता यात्रा लेकर कन्याकुमारी से कश्मीर गया था, इस बार मैं कश्मीर से कन्याकुमारी आया हूं। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने देश को तोड़ने का सपना देखने वालों को नकार दिया है। अब तमिलनाडू के लोग भी ऐसा ही करने जा रहे हैं। मैं तमिलनाडू की धरती पर बहुत बड़े परिवर्तन की आहट देख रहा हूं। तमिलनाडू में भाजपा का प्रदर्शन इस बार DMK और कांग्रेस के INDI गठबंधन का सारा घमंड तोड़ कर रख देगा।

पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “हमने ऑप्टिकल फाइबर और 5G दिया, हमारे नाम पर डिजिटल इंडिया स्कीम है। इंडी अलायंस के नाम पर लाखों करोड़ रुपए का 2G का स्कैम है और डीएमके उस लूट की सबसे बड़ी हिस्सेदार थी। हमारे नाम पर उड़ान स्कीम है, इंडी अलायंस के नाम हेलीकॉप्टर स्कैम है। हमारी खेलो इंडिया और TOPS स्कीम्स से देश ने खेलों में ऊंचा मुकाम हासिल किया, लेकिन उनके नाम पर CWG स्कैम का दाग है।उन्होंने कहा इंडी अलायंस कभी भी तमिलनाडु को विकसित नहीं बना सकता। इन लोगों का इतिहास घोटालो का है। इन लोगों की राजनीति का आधार लोगों को लूटने के लिए सत्ता में आना है। एक तरफ भाजपा की कल्याणकारी योजनाएं होती हैं, तो दूसरी ओर इनके करोड़ों के घोटाले होते हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना में शामिल होंगे मछुआरे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डीएमके तमिलनाडु के भविष्य की ही दुश्मन नहीं है, डीएमके तमिलनाडु के अतीत की, उसकी विरासत की भी दुश्मन है। हम तमिलनाडु के बंदरगाह बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं। मैंने हाल ही में थूथुकुडी में चिदंबरनार बंदरगाह का उद्घाटन किया है। उन्होंने कहा हमारी सरकार मछुआरों के कल्याण के लिए भी काम कर रही है। उन्हें आधुनिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने से लेकर किसान क्रेडिट कार्ड योजना के दायरे में लाने तक, हमने उनकी जरूरतों का ख्याल रखा है।

उन्होंने कहा डीएमके और कांग्रेस तब भी चुप बैठी रही, जब जल्लीकट्टू पर पाबंदी लगी थी। ये लोग तमिल संस्कृति को नष्ट करना चाहते हैं। ये हमारी सरकार है, NDA की सरकार है जिसने जल्लीकट्टू को पूरे उत्साह के साथ मनाए जाने का रास्ता साफ किया। जब दिल्ली में संसद की नई इमारत बनी तो तमिल संस्कृति के प्रतीक, इस धरती के आशीर्वाद स्वरुप पवित्र सेंगोल को हमने नए भवन में स्थापित किया, लेकिन इन लोगों ने इसका भी बॉयकॉट किया, उन्हें सेंगोल की स्थापना पसंद नहीं आई। पीएम मोदी ने कहा इंडी अलायंस के ये लोग तमिलनाडु के लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ के भी जिम्मेदार हैं। श्रीलंका में हमारे मछुआरे भाइयों को फांसी की सजा दी गई थी, ये मोदी चुप नहीं बैठा। हर रास्ते का इस्तेमाल किया और हर प्रकार का दबाव बनाया और मैं उन सभी मछुआरों को श्रीलंका से फांसी के फंदे से उतारकर वापस लाया।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।