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महाराष्ट्र में गरजे पीएम मोदी, सिंचाई परियोजना पर कांग्रेस को घेरा

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नई दिल्ली। तीसरे चरण के मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के माढा में चुनाव प्रचार किया। यहां उन्होंने एक रैली को भी संबोधित किया। रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भाजपा-एनडीए सरकार महाराष्ट्र को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए काम कर रही है। पीएम मोदी ने इस रैली में कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस के 60 वर्षों के कार्यकाल की तुलना अपने दस वर्षों के कार्यकाल से की। इसके अलावा सिंचाई परियोजना को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस को घेरा। इस दौरान पीएम मोदी ने विकसित भारत बनाने में महिलाओं के योगदानों की भी सराहना की।

पीएम मोदी ने कहा, “बीते 10 साल में आपने जब से मुझे काम दिया है, मैंने अपने शरीर का कण-कण और समय का पल-पल आपकी सेवा में लगाया है। आज देश के लोग, महाराष्ट्र के लोग, मोदी सरकार के 10 साल और कांग्रेस सरकार के 60 साल में अंतर देख रहे हैं। कांग्रेस 60 वर्षों में जो नहीं कर पाई, आपके इस सेवक ने 10 साल में करके दिखाया है।”

#WATCH माढा, महाराष्ट्र: एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “महाराष्ट्र के लोग मोदी सरकार के 10 साल और कांग्रेस सरकार के 60 साल के अंतर को देख रहे हैं। कांग्रेस जो 60 साल में नहीं कर पाई वो काम हमने 10 साल में करके दिखाया है।

पीएम मोदी ने इस रैली में सिंचाई परियोजना को लेकर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा 2014 में सरकार बनने के बाद, मैंने पूरी शक्ति सिंचाई परियोजनाओं पर लगा दी। कांग्रेस की लटकाई 100 परियोजनाओं में से 63 हमने पूरी की हैं। हर खेत में, हर घर तक पानी पहुंचाना मेरे जीवन का बहुत बड़ा मिशन है। उन्होंने आगे कहा विदर्भ हो या मराठवाड़ा, बूंद बूंद पानी के लिए तरसाने का ये पाप वर्षों से होता रहा है। कांग्रेस को देश ने 60 साल तक राज करने का मौका दिया। इन 60 वर्षों में दुनिया के अनेक देश पूरी तरह से बदल गए, लेकिन कांग्रेस किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंचा पाई। 2014 में करीब 100 सिंचाई परियोजनाएं ऐसी थीं, जो कई दशकों से लटकी पड़ी थीं, इसमें से 26 परियोजनाएं महाराष्ट्र से थीं। सोचिए, कितना बड़ा धोखा कांग्रेस ने महाराष्ट्र को दिया है।

रैली में मौजूद लोगों से प्रधानमंत्री ने कहा मोदी, देश की पूरी ग्रामीण व्यवस्था में सहकारिता के दायरे को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए 2019 में जब आपने फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, तो हमने पहली बार सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय बनाया। 10 साल पहले, जब रिमोट कंट्रोल वाली सरकार चलती थी, तब महाराष्ट्र के कद्दावर नेता कृषि मंत्री थे। जब यहां के कद्दावर नेता दिल्ली में राज करते थे, तब गन्ने का एफआरपी करीब 200 रुपये था और आज मोदी के सेवाकाल में गन्ने का एफआरपी करीब 350 रुपये है।

रैली में पीएम मोदी ने देश की नारी शक्ति के योगदानों की सराहना की। उन्होंने बताया कि विकसित भारत बनाने में देश की नारी शक्ति की बहुत बड़ी भूमिका है। बीते दस वर्षों में हमारे प्रयासों से एक करोड़ बहनें लखपति दीदी बनी हैं। पीएम मोदी ने गारंटी देते हुए कहा, “मैं 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाऊंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धाराशिव में रैली को संबोधित करते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो प्रतिद्वंद्वी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से मुकाबला करने में असमर्थ हैं, वे टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कर फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा उनकी (विपक्ष) स्थिति अब ऐसी हो चुकी है कि उनका झूठ भी अब काम नहीं कर रहा है। वे एआई की मदद से मेरे चेहरे का इस्तेमाल करके फर्जी वीडियो बनाकर अपनी मोहब्बत की दुकान में बेच रहे हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान बाजरा को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के लिए अपने सरकार के जोर की भी बात की। उन्होंने कहा, “मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि बाजरा दुनिया भर में खाने की मेज तक पहुंचे। पीएम मोदी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से आयोजित रात्रिभोज में भी बाजरा को मेन्यू में रखा गया था।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।