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संसद में हुई चूक को लेकर राजनीति गरमाई, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने खड़े किए सवाल

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सीबीआई, ED की कार्रवाई पर बोले – भाजपा के इशारे पर चलने वाले संस्थान

नई दिल्ली। संसद में हुई चूक को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। विपक्षी पार्टियां संसद में हुई चूक को लेकर भाजपा पर हमला बोल रही हैं। वहीं अब कांग्रेस ने भी संसद में हुई चूक को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने डीबी न्यूज नेटवर्क से बातचीत के दौरान संसद में हुई चूक को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए।

भाजपा सांसद ने प्रवेश पास उपलब्ध कराए
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि संसद में आक्रमण होना सुरक्षा में चूक है इससे बड़ा चिंता का विषय दूसरा है जो सांसद है जिसने पास उपलब्ध कराए वह बीजेपी के हैं। इस पर बीजेपी चर्चा से बचना चाहती है। चुनाव के जो नतीजे आए हैं उससे लोगों को भी लग रहा है कि इलेक्शन कमीशन जो है वह एक तरफा काम कर रहा है चुनाव में धांधली भी हुई है। इस चर्चा से बचने के लिए और ध्यान भटकाने के लिए यह सब ड्रामा किया गया है। जितने बड़े घटनाक्रम पूरे देश में पिछले सालों में हुए हैं, आप ध्यान दीजिए एक घटना घटती है फिर दूसरी घटना उसी के तुरंत बाद होती है। ताकि मुख्य घटना पर लोग ध्यान न दें। यह बीजेपी लगातार कर रही है, और बीजेपी का यह फार्मूला है।

उन्होंने कहा कुछ छोटे अधिकारियों, कर्मचारियों को फंसा दिया जाएगा। क्योंकि भाजपा की सरकार है। बातें भले ही बड़ी की जाती हैं, विश्व की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं और कहते हैं की सबसे बड़ा हमारा नेटवर्क है। उन्होंने कहा कि मान लीजिए अगर यह बेरोजगार लोग नहीं होते अगर सही में कोई आतंकवादी होता तो उसे संसद में बड़ी चूक हुई है। मैं तो कहूंगा यह जान पूछ कर की गई है।

भाजपा के पास नेता धुलाई की मशीन उपलब्ध, जाते ही धूल जाते पाप
निश्चित रूप से यह देख लीजिए कि किसी भी स्टेट में जिस नेता से इनको दिक्कत होती है उस पर यह सीबीआई, ED की कार्रवाई करते हैं। और ऐसी स्टेट में यह कार्रवाई करते हैं जैसे कि महाराष्ट्र और अन्य स्टेट है जो नेता उनको छोड़कर चले गए थे उनके ऊपर कारवाई की गई। जैसे ही उन नेताओं ने वापस बीजेपी में एंट्री की वैसे ही उनके सारे केस कहां चले गए किसी को कुछ पता नहीं चला।

उन्होंने आगे कहा कि यह सारे क्वेश्चन हैं, यह बड़ी बहस का मुद्दा है। बीजेपी ने जितने मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। वह आज सबके सब गायब हो गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गंगा मैया से भी कोई बड़ी नदी यह लेकर आ गए हैं अपनी पार्टी में जिनको यह खुद अपराधी बोलते हैं। भ्रष्टाचारी बोलते हैं उस नदी में यह उनकी खुद डुबकी लगवाते हैं और बाहर निकलते हैं। और फिर वह सभी नेता साफ हो जाते हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।