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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब में हिमाचल पैटर्न पर मोर्चा संभालेंगी प्रियंका गांधी

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। गुरुवार तक राज्य में पीएम मोदी दो चुनावी सभाएं कर चुके हैं। उनके निशाने पर सीधे तौर पर कांग्रेस रही। प्रधानमंत्री के हमले और बीजेपी की आक्रामक चुनाव प्रचार शैली का दबाव विपक्षी पार्टी पर है। इस बार मतदाताओं के मोदी मैजिक सिर चढ़कर न बोले। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इसके लेकर सतर्क है। पीएम मोदी को टक्कर देने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा को मैदान में उतारा गया है। प्रियंका की जनसभाओं में ऐसे क्षेत्रों को फोकस किया गया है। जहां बीजेपी के स्टार प्रचारक नहीं पहुंचे हैं। हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रचार में यह पैटर्न उपयोग कर चुकी है। अब इसे उत्तराखंड में आजमाने की तैयारी है। कांग्रेस उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी दौरे पर नजर रख रही है। मोदी बीजेपी के ब्रांड एंबेसडर हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी पांचों लोकसभा सीट जीती थी, लेकिन 2014 और 2019 में एक भी सीट पर खाता नहीं खुला। इसका प्रमुख कारण पीएम मोदी रहे हैं।

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नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में क्लिन स्वीप का खतरा बना हुआ है। प्रदेश में 19 अप्रैल को मतदान होना है। कांग्रेस की चिंता का अन्य कारण बीजेपी का चुनाव प्रचार भी है। उम्मीदवार चुनने के लेकर चुनाव प्रबंधन और स्टार प्रचारकों के लिए भाजपा ने जिस प्रकार के कदम उठाएं हैं। कांग्रेस का उसका तोड़ ढूंढ़ने का जबाव बढ़ गया है।

प्रियंका गांधी 13 अप्रैल को होने वाली जनसभाओं की तैयारी में जुट गई है। पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा देहरादून पहुंच गई हैं। प्रियंका रामनगर और रुड़की में होने वाली चुनावी सभाओं को सफल बनाने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही है। उत्तराखंड के चुनावी मैदान में पार्टी ने राहुल गांधी से पहले प्रियंका को उतारा है। पार्टी की योजना वोटर्स के बीच पैठ मजबूत करने की है।

गढवाल संसदीय क्षेत्र में प्रियंका गांधी की सभा के लिए रामनगर का चयन रणनीति के साथ किया गया। रामनगर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटर्स की संख्या ज्यादा है। यह गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के बीच दूरस्थ क्षेत्र है। यहां भाजपा ने स्टार प्रचारक नहीं उतारे हैं। कांग्रेस अग्निपथ योजना का विरोध कर रही है। गढ़वाल सैनिक बहुत है। साथ ही यहां रेजिमेंट का मुख्यालय भी है। पार्टी प्रियंका के माध्यम से महिला मतदाताओं और तीन संसदीय क्षेच्रों को साधने का प्रयास करेगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।