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आगरा में आज जोश भरेंगे राहुल, अखिलेश यादव और प्रियंका

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आगरा। कांग्रेस के लिए जनाधार जुटाने और पदाधिकारियों में नई ऊर्जा लाने के लिए भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकलने राहुल गांधी रविवार को आगरा आ रहे हैं। उनके साथ प्रियंका गांधी बाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी होंगे हाथरस के रास्ते टेढ़ी बगिया के माध्यम से आगरा में यात्रा दोपहर दो बजे प्रवेश करेगी ।पांच किलोमीटर दूरी तय कर नुनिहाई, माल रोड सैंया होते हुए धौलपुर के रास्ते शाम साढ़े चार बजे राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेगी।

वर्ष 2017 के चुनाव में अपना रंग बिखेरने वाली दो लड़कों की जोड़ी उप्र में गठजोड़ से भाजपा की दिल्ली पहुंचने की रफ्तार काे रोकना चाहती है। ब्रजक्षेत्र की 13 में से 12 सीटों पर गत लोकसभा चुनाव में कमल खिला है, जबकि मैनपुरी में साइकिल ने दौड़ लगाई थी।

इस बार कांग्रेस मजबूती से साइकिल को पकड़ उप्र में खुद को मजबूत करने के साथ ही कमल को खिलने से रोकने में जुटी है। मुरादाबाद, अलीगढ़, हाथरस होते हुए यात्रा रविवार को टेढ़ी बगिया से आगरा में प्रवेश करेगी। आंबेडकर प्रतिमा का माल्यार्पण कर यात्रा सौ फुटा रोड पर कुछ दूर पैदल चलेगी। इसके बाद रथ और गाड़ियों में सवार होकर काफिला तीनों नेता के साथ आगे बढ़ेगा। जगह-जगह पार्टी कार्यकर्ता स्वागत करेंगे।

यात्रा शाहदरा चुंगी, नुनिहाई, आंबेडकर पुल से यमुना किनारे, माल रोड, सैंया होते हुए धौलपुर की सीमा में प्रवेश कर जाएगी। इससे पहले तेहरा में सभी नेता जनसभा को संबोधित करेंगे। यात्रा के साथ कई दिग्गज नेता भी आ रहे हैं। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, योगेंद्र यादव, केसी वेणुगोपाल, डा. कन्हैया कुमार, पीएल पूनिया, नसीमुद्दीन सिद्दिकी हैं।

शनिवार को सपा जिला कार्यालय पर सपा और कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बैठक की, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई। यहां से ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल होंगे। सपा के महानगर अध्यक्ष वाजिद निसार ने बताया कि तैयारियों को लेकर जिम्मेदारी दी गई हैं, 150 जगह पर यात्रा का स्वागत करने के लिए मंच तैयार किए गए हैं। यात्रा में कांग्रेस और सपा कार्यकर्ता जुड़ते जाएंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।