db News Network

Home » बांग्लादेश में हिंसा को लेकर ये बोले शशि थरूर

बांग्लादेश में हिंसा को लेकर ये बोले शशि थरूर

0 comments 70 views 3 minutes read

नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंसा का दौर अभी भी जारी है। भीषण आगजनी के बीच हालात बेहद खराब हो गए हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं। पड़ोसी देश की मौजूदा हालात पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को हमें जो पहला और सबसे महत्वपूर्ण संकेत देने की जरूरत है, वह यह है कि हम उनके साथ खड़े हैं। इसमें हमारा कोई स्वार्थ नहीं छिपा है। शेख हसीना और बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘यह बहुत स्पष्ट रूप से शेख हसीना युग का अंत है, इसमें कोई संदेह नहीं है। वह 76 साल की हैं और मुझे नहीं लगता कि वह निर्वासन में बैठकर सत्ता में वापसी की योजना बना रही हैं, यह नासमझी होगी।’
विज्ञापन

भारत ने हर सरकार के साथ निष्पक्षता से काम किया
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, ‘हमने पिछले आधी सदी में मुक्ति आंदोलन से जुड़ी ताकतों, शेख मुजीबुर रहमान और अब उनकी बेटी के बीच लंबे समय तक चलने वाला नाटक देखा है। दूसरी तरफ, लोग सेना से और कुछ हद तक बांग्लादेश के भीतर अधिक इस्लामी ताकतों से जुड़े हुए हैं। बांग्लादेश कभी पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था। उस समाज के कुछ हिस्सों में इस्लामी उत्साह के लिए एक निश्चित आधार है। भारत ने हर सरकार के साथ निष्पक्षता से काम किया है, यहां तक कि उन सरकारों के साथ भी जो हमारे प्रति खुले तौर पर मित्रवत नहीं थीं। मुझे लगता है कि हमें ठीक उसी काम को जारी रखना होगा।

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के बारे में पूछे जाने पर थरूर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमें खुद को उनकी मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए। भारत को हर किसी को आश्वस्त करना चाहिए कि हम एक अमित्र शक्ति नहीं हैं और बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर हावी होने या नियंत्रित करने की हमारी कोई इच्छा नहीं है। हम मददगार बनना चाहते हैं। मेरा मानना है कि यह उस तरह का संदेश होगा, जिसे सार्वजनिक और निजी तौर पर दोनों तरह से देना चाहिए।’

बांग्लादेश के बिगड़े हालातों पर कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘जहां तक भारत का सवाल है, हमें बांग्लादेश के लोगों को पहला और सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह देने की जरूरत है कि हम उनके साथ खड़े हैं। इसमें भारत का कोई अन्य निहित स्वार्थ नहीं है। हिंदुओं के घरों, मंदिरों और व्यक्तियों पर हमलों की कुछ परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं। हम सभी ने कल लूटपाट की तस्वीरें देखीं। हो सकता है कि कुछ दिनों में स्थिति शांत हो जाए और स्थिर हो जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो शरणार्थियों के हमारे देश में आने का भी खतरा है और यह गंभीर चिंता का विषय होगा।

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि हमारे उच्चायुक्त और हमारे कर्मचारी सुरक्षित हैं और स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। हम अभी भी नहीं जानते कि अंतरिम सरकार में कौन होगा। जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव के बारे में भारत में कुछ चिंताएं समझ में आती हैं, जिसने अतीत में भारत के प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाया है और चीन और पाकिस्तान द्वारा संभावित हस्तक्षेप भी चिंता बढ़ा सकता है। हम एक अस्थिर या अमित्र पड़ोसी नहीं चाहते।’

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।