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राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा का जोरदार प्रदर्शन, माफी की मांग

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार को राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में हिंदू समाज को लेकर दिए गए बयान के खिलाफ भाजपा ने संसद के बाद अब सड़क पर अपनी लड़ाई तेज कर दी है।
भाजपा के युवा मोर्चा (भाजयुमो) और विभिन्न प्रदेशों के पार्टी कार्यकर्ताओं ने बुधवार को देशभर में सड़कों पर उतरकर राहुल गांधी के बयान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और कांग्रेस नेता से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। देश की राजधानी दिल्ली में भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद तेजस्वी सूर्या और भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने राहुल गांधी पर संसद में हिंदुओं के खिलाफ नफरत भरा भाषण देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस मुख्यालय तक भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मार्च कर मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी, योगेंद्र चंदोलिया एवं बांसुरी स्वराज सहित पार्टी के अन्य नेता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। वहीं, भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने देशभर के सभी राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन कर राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की।
भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं से देश के सभी संगठनात्मक जिलों में सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। भाजयुमो ने दावा किया कि हर राज्य में विरोध प्रदर्शन में सभी क्षेत्रों के लोगों की भारी भागीदारी देखी गई।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस प्रकार से पूरे हिंदू समाज को आतंकवादी, हिंसक कहा है, यह अक्षम्य अपराध है और राहुल गांधी जब तक माफी नहीं मांगते तब तक भाजपा अपना संघर्ष जारी रखेगी। 26/11 के टेरर अटैक को पूरी कांग्रेस पार्टी ने हिंदू संगठनों के ऊपर डालने की कोशिश की थी। दिग्विजय सिंह ने तो भगवा आतंकवाद के ऊपर किताब का विमोचन भी किया था। देश के अंदर 80 फीसदी दंगे कांग्रेस पार्टी की सरकार के रहते हुए हैं। कांग्रेस ने आतंकवाद को पनाह देने का काम किया है और इसलिए सांप्रदायिक दंगे होते रहे हैं। जिस धर्म ने 5 हजार वर्ष से अधिक समय से समाज को सौहार्द और शांति का मंत्र दिया है, ऐसे हिंदू समाज को अपमानित करने की साजिश राहुल गांधी द्वारा की गई है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि हिंदू संस्कृति को गाली देना, हिंदुओं को गाली देना, उन्हें आतंकवादी कहना, यह सब चुनावी हिंदू राहुल गांधी की साजिश है, जिसका जवाब देश के करोड़ों हिंदू जरुर देंगे। राहुल गांधी ने सदन के अंदर सोची समझी राजनीतिक चाल चली है क्योंकि उन्हें अपनी बहन प्रियंका गांधी को वायनाड से चुनाव लड़वाना है। वे तो खुद पश्चिमी सभ्यता के बीच बड़े हुए हैं, वे हिंदू संस्कृति को कभी नहीं समझ सकते, लेकिन राहुल गांधी को हिंदू समाज की ताकत का अंदाजा नहीं है। राहुल गांधी ने पूरी भारतीय संस्कृति को गाली दी है और उन्हें देश के लोगों से माफी मांगनी ही पड़ेगी।
विरोध प्रदर्शन को भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और मनोज तिवारी ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़कर कांग्रेस मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद दूसरे बैरिकेड्स के सामने उन्हें रोका गया और पुलिस तेजस्वी सूर्या और वीरेंद्र सचदेवा सहित भाजपा के अन्य नेताओं को डिटेन कर तिलक मार्ग थाने ले गई, जहां से कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।