db News Network

Home » भारत जोड़ो न्याय यात्रा का उद्देश्य इस देश के युवाओं को न्याय दिलाना, राहुल गांधी देश के हर वर्ग के साथ, बोले न्याय यात्री

भारत जोड़ो न्याय यात्रा का उद्देश्य इस देश के युवाओं को न्याय दिलाना, राहुल गांधी देश के हर वर्ग के साथ, बोले न्याय यात्री

0 comments 378 views 3 minutes read

नई दिल्ली। 2024 के आम चुनाव में बस कुछ ही समय शेष है। और कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रमुख और सांसद राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक 6,700 किलोमीटर से ज़्यादा की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी को शुरू की है। यह यात्रा बस से और पैदल 66 दिनों में 15 राज्यों के 100 लोकसभा संसदीय क्षेत्र और 337 विधानसभा क्षेत्र से गुज़रेगी। इससे पहले राहुल गांधी ने सितंबर 2022 से लेकर जनवरी 2023 तक कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की थी।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा में यात्री भारतीय युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव आतिशा पैठणकर और भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अजीत सिंह ने डीबी न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत के दौरान क्या कुछ कहा, आइए आपको बताते हैं।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अजीत सिंह जो की महाराष्ट्र से आते हैं, उन्होंने कहा कि हमारी इंडियन यूथ कांग्रेस की टीम राहुल गांधी जी के साथ इस न्याय यात्रा में शामिल हुए हैं। कन्याकुमारी से कश्मीर तक जो भारत जोड़ो यात्रा में सपोर्ट मिला था। वैसा ही सपोर्ट हमें भारत जोड़ो न्याय यात्रा में मणिपुर से मिलना शुरू हुआ है जो मुंबई तक मिलेगा। मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम और नागालैंड में सभी जगह पर हमें बहुत अच्छा रिस्पांस लोगों का देखने को मिल रहा है आज गणतंत्र दिवस और कल का राहुल गांधी जी ने दो दिन यात्रा को ब्रेक दिया है। प्रेजेंट में हम अभी पश्चिम बंगाल में हैं। पश्चिम बंगाल के बाद हम बिहार एंटर करेंगे।

अजीत सिंह बोले कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा में राहुल गांधी जी के साथ देश के जो लोग हैं, वह न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। पर भाजपा के नेता इस यात्रा से डरे हुए हैं। जिस वजह से वह। हमारे ऊपर जुल्म कर रहे हैं। देश में तानाशाही फितरत लेकर आ रहे हैं। पर उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह देश महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह का देश है हम इनको फॉलो करते हैं। हम हंस के जवाब देते हैं, लेकिन जहां देश के लोगों के सम्मान की बात आएगी तो हम भाजपा की भाषा में भी जवाब देना जानते हैं। राहुल जी ने कहा है कि डरो मत, राहुल जी हमेशा नौजवानों के, किसानों के और देश के हर वर्ग के साथ खड़े हैं।

वहीं भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव आतिशा पैठणकर ने कहा कि पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी ने मोहब्बत, शांति और अमन का संदेश लेकर श्रीनगर के लाल चौक में 27 जनवरी को झंडा फहराया था। जब हम कन्याकुमारी से कश्मीर तक चले तो हमें कहीं भी नफरत नजर नहीं आई लोगों के दिल में राहुल जी के लिए बहुत प्यार है। नफरत फैलाने के लिए बीजेपी और आरएसएस का एजेंडा है। बीजेपी सोशल मीडिया और आईटी सेल से जो दिखाती है वैसा कुछ भी नहीं है। हम जब लोगों के पास जाते हैं तो लोग हमें अपना समझते हैं।

आतिशा ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी के लिए भाजपा की सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता चाहते हैं कि पढ़े-लिखे युवा राजनीतिक में ना आएं, राजनीति में अच्छी पोजीशन पर ना रहें, जो नफरत फैलाई जा रही है उसमें युवा भी शामिल हो जाएं। राहुल जी की यात्रा में कई युवा आते हैं और राहुल जी से कहते हैं कि हमें न्याय चाहिए हम पढ़े-लिखे हैं, हमें नौकरी चाहिए यह न्याय यात्रा देश के युवाओं को न्याय दिलाने के लिए निकाली जा रही है।

आज से पहले कभी भी इतनी बेरोजगारी नहीं थी। जो सरकारी विभाग हैं, उनका निजीकरण कर दिया गया है। जिस कारण इस देश में युवाओं के सामने बेरोजगारी का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बीजेपी धर्म के नाम पर राजनीतिक कर रही है और युवाओं को धर्म के नाम पर बहका रही है। विकास से परे धर्म के नाम पर राजनीतिक करना ही बीजेपी का मुख्य एजेंडा है।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।