नई दिल्ली। 4 जून को लोकतंत्र के महापर्व के नतीजे आएंगे और यह स्पष्ट हो जाएगा कि अगले 5 साल तक देश की सत्ता पर कौन राज करेगा। इस दौरान, मोदी सरकार के विकास कार्यों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लोगों ने कहा कि मोदी सरकार ने काम तो किया है, लेकिन इससे बेहतर काम भी हो सकता था। अब जो भी सरकार आए, उसे स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
इकोनॉमिक्स सब्जेक्ट एक्सपर्ट शशांक कपूर ने कहा कि पिछले दस वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। फिर भी, विकास की काफी संभावनाएं हैं और शिक्षा के क्षेत्र में और सुधार किया जा सकता है। हमारी सरकार को गुणवत्ता शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। आने वाली कोई भी सरकार जो अगले पांच साल के लिए सत्ता में आए, उन्हें गुणवत्ता शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
सरकारों को ग्रामीण इलाकों के स्कूलों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। अगर ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे डिजिटल तरीके से पढ़ाई करें, तो उन्हें और बेहतर शिक्षा प्राप्त हो सकेगी, जिससे वे और आगे बढ़ सकेंगे। हाल ही में आई नई शिक्षा नीति काफी अच्छी है। 4 जून के बाद जो भी सरकार सत्ता में आए, उसे सबसे पहले शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए ताकि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली और बेहतर हो सके और बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा मिल सके।
अभी हाल ही में ट्वेल्थ क्लास में 96% स्कोर करने वाली स्टूडेंट टिया गोयल का कहना है कि यदि हमें भविष्य की चिंता है तो पहले हमें यह देखना होगा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने क्या किया है। इस अवधि में कई अच्छी चीजें की गई हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में कमियां भी बनी रही हैं। उदाहरण के तौर पर, एक विद्यार्थी के रूप में, मुझे कहना होगा कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया है, बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी की हैं, और शिक्षकों को उच्च वेतन पर नियुक्त किया है। लेकिन व्यवस्थाएं अभी भी सही नहीं हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत और भी बुरी है, जहां बच्चों को पीने के लिए ठंडा पानी तक उपलब्ध नहीं है और गर्मी में पंखे ठीक से काम नहीं करते। ऐसी परिस्थितियों में हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि सरकारी स्कूलों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों के बच्चों से प्रतिस्पर्धा कर सकें? फिर हम बेरोजगारी की बात करते हैं, जिसका मुख्य कारण यही है कि बच्चों को पढ़ने के लिए सही माहौल नहीं मिल रहा है।
सरकार ने इमारतें और बोर्ड तो लगा दिए हैं, लेकिन मैनेजमेंट के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की जरूरत है। दिल्ली सरकार के स्कूल मॉडल की प्रशंसा करते हुए कहना चाहूंगी कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी द्वारा बनाए गए स्कूल बेहतरीन हैं और बच्चों को असल दुनिया के लिए तैयार कर रहे हैं। ऐसा मॉडल पूरे देश में लागू होना चाहिए।
कॉलेजों की स्थिति पर नजर डालें तो वहां भी बहुत सी कमियां हैं। कॉलेज की इमारतें तो खड़ी कर दी गई हैं, लेकिन मैनेजमेंट का अभाव है। प्राइवेट कॉलेज की फीस इतनी अधिक है कि पढ़ने वाला बच्चा पढ़ ही नहीं पाता। इसलिए, अधिक सरकारी कॉलेज खुलने चाहिए, लेकिन बेहतर व्यवस्था के साथ ताकि जो बच्चे प्राइवेट कॉलेज की फीस नहीं दे सकते, वे भी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त कर सकें। और सरकार को महिला सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए।
पर्यावरणविद चंचल गोयल का कहना है कि ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने काम नहीं किए हैं। मोदी सरकार ने कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन जो लाभ जनता को मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल पाया है। सरकार ने बाहरी दिखावे के लिए काम किए हैं ताकि लोगों को बताने के लिए कुछ हो, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ है। 100 स्मार्ट सिटी की बात की गई थी, लेकिन एक भी सिटी नहीं बनी है। सड़कों पर तो लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन शहर की गलियों में कोई काम नहीं हुआ है। महिलाएं जब बाजार या किसी अन्य जगह जाती हैं, तो वहां शौचालय की व्यवस्था नहीं है। यदि 10-20 किलोमीटर पर एक शौचालय मिल भी जाता है, तो वह साफ-सुथरा नहीं होता है।
महिला सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ काम किए हैं, जैसे हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए हैं। लेकिन मेडिकल सुविधाओं की बात करें तो, तत्काल सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती है। हमारे देश की जनता अभी इतनी पढ़ी-लिखी नहीं है, और कई लोग इंटरनेट का उपयोग नहीं जानते हैं, जिससे वे पीछे रह जाते हैं। मेरे घर की एक सहायक के साथ एक दुर्घटना हुई थी, और ट्रॉमा सेंटर में हमें तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई। हेल्थ सिस्टम में बदलाव की जरूरत है। सरकार ने काम किए हैं, लेकिन मैनेजमेंट सही तरीके से नहीं हुआ है।
यदि किसी बच्चे को 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई करनी हो, तो उसे अच्छे कॉलेज नहीं मिल पाते हैं। मेट्रो शहरों को छोड़कर, ग्वालियर और मध्य प्रदेश में अच्छे कॉलेज उपलब्ध नहीं हैं। मोदी जी ने पिछले 10 वर्षों में काम किया है, लेकिन और अधिक काम हो सकता था। 4 तारीख के बाद जो भी सरकार आए, चाहे मोदी जी हों या कोई अन्य, उनकी पहली प्राथमिकता मेडिकल सिस्टम और शहर की गलियों में विकास होना चाहिए।
ज्योति अग्रवाल जो कि एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उनसे पिछले 10 वर्षों के विकास के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में विकास हुआ है। यातायात व्यवस्था भी काफी बेहतर हुई है। पहले जहां कहीं जाने में बहुत समय लगता था, वहीं अब नए हाईवे बनने से कहीं भी जल्दी पहुंचा जा सकता है। सड़कों का निर्माण बहुत अच्छी तरह से किया गया है।
हाल ही में नेपाल से वापस आईं ज्योति ने बताया कि नेपाल की सड़कों की खराब हालत देखकर उन्हें एहसास हुआ कि भारत की सड़कों की स्थिति कितनी अच्छी है और इसके लिए उन्होंने मोदी जी का धन्यवाद किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार के दौरान महंगाई बढ़ी है, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों को काफी परेशानी हो रही है। जीएसटी का महंगाई पर असर देखने को मिल रहा है और व्यापार में भी महंगाई बढ़ी है और जीएसटी भी काफी बढ़ा दी गई है।
ज्योति ने यह भी कहा कि आने वाली सरकार को सबसे पहले इन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा की मेरा शहर ग्वालियर विकास की दृष्टि से अभी बहुत पीछे है। यहां सड़कों की हालत बहुत खराब है। अच्छी सड़कें बनती हैं, लेकिन फिर उन्हें दोबारा खोद दिया जाता है, जिससे जनता का पैसा बर्बाद होता है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मध्यप्रदेश के इंदौर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ग्वालियर को इंदौर जैसा बनने में काफी समय लगेगा, लेकिन यदि सांसद अच्छा काम करें तो ग्वालियर भी काफी आगे बढ़ सकता है।
समाजसेवी नीलम शाह ने कहा कि मोदी जी ने देश के लिए सराहनीय काम किया है। हमारे देश ने हर क्षेत्र में दूसरों से आगे निकलकर काफी तरक्की की है। दूसरों की तुलना में हमारे देश का नाम ऊंचा हुआ है। वर्तमान में हमारे देश को अंतराष्ट्रीय पटल पर पहले की तुलना में अधिक महत्व दिया जा रहा है। सुरक्षा के मामले में भी हमारे देश ने तरक्की की है। हालांकि, अगली सरकार कोई भी हो, महंगाई पर नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि इससे हमारा बजट बिगड़ता है। महंगाई आसमान छू रही है, जिससे सड़कों की हालत खराब हो रही है और स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण अक्सर दुर्घटनाएं हो रही हैं। सड़कें तो बन गई हैं, लेकिन स्ट्रीट लाइटें अक्सर गायब रहती हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। इसके अलावा, रिक्शा चालक अक्सर कहीं भी रुक जाते हैं, जिससे यातायात जाम हो जाता है। कई पदों पर रिक्तियां होने के बावजूद सरकार उन्हें भरने में विफल रहती है, जिससे बेरोजगारी बढ़ती है। इन मुद्दों पर ध्यान देने से बेरोजगारी और विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति से दोनों को कम किया जा सकता है।
मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है। यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।
अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।
जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है। पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।
आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।
वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।
एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।
डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम
बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं, लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।
हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।
पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।
दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी
वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।
वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।