मध्य प्रदेश के इंदौर से आने वाले दो युवा उद्यमी रितिक साहू और शशांक गर्ग ने मिलकर “उड़ते कबूतर” नाम की एक अनोखी कम्युनिटी की शुरुआत की है, जो शहर की कला, संस्कृति और विरासत को एक नए अनुभव के रूप में आम लोगों तक पहुंचा रही है। यह विचार तब आया जब दोनों दोस्तों ने महसूस किया कि इंदौर को लोग केवल “खाने की राजधानी” के रूप में जानते हैं, जबकि यहां की धरोहर, इतिहास और लोक संस्कृति भी उतनी ही समृद्ध है। करीब ढाई साल पहले शुरू हुई यह पहल आज एक आंदोलन बन चुकी है, जो युवाओं को अपने शहर की जड़ों से जोड़ रही है।
“उड़ते कबूतर” ने इंदौर में अब तक 170 से अधिक इवेंट्स आयोजित किए हैं, जिनमें हेरिटेज वॉक, आर्ट वर्कशॉप, ब्लॉक प्रिंटिंग, पॉटरी अनुभव, वनडे ट्रिप्स और लोकल मार्केट फेस्ट शामिल हैं। इन इवेंट्स की खास बात यह है कि ये आम जनता के लिए खुले होते हैं — ताकि हर व्यक्ति अपने शहर की असली आत्मा को महसूस कर सके। शशांक बताते हैं कि उनके पॉटरी और ब्लॉक प्रिंटिंग इवेंट्स में 5000 से ज्यादा लोग भाग ले चुके हैं। वहीं रितिक कहते हैं कि हर शनिवार या रविवार को वे बिना रुके कोई न कोई गतिविधि आयोजित करते हैं, ताकि लोग “खाने के अलावा” भी इंदौर में कुछ नया अनुभव कर सकें।
रितिक और शशांक दोनों का सपना है कि मध्य प्रदेश की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर लाया जाए। वे इंदौर के बाद अब मालवा क्षेत्र और पूरे प्रदेश में अपने इवेंट्स का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि साँची, खजुराहो, ओरछा, ग्वालियर और शिवपुरी जैसे ऐतिहासिक स्थलों की समृद्ध विरासत को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ा जाए। “उड़ते कबूतर” सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन है जो यह साबित कर रहा है कि जब युवा अपनी मिट्टी से जुड़ते हैं, तो वे परंपरा को एक नई उड़ान दे सकते हैं।





