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कंगना पर बरसे विक्रमादित्य, बोले- प्रदेश में उनके मनोरंजन का समय अब पूरा हो चुका

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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मंडी से कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा प्रत्याशी कंगना रणाैत पर निशाना साधा है। मंडी ने आयोजित प्रेस वार्ता उन्होंने कहा कि कंगना खुद मोदी के नाम पर वोट मांग रही हैं। एसपीयू मंडी एक राजनीतिक विचारधारा का अखाड़ा बनकर रह गया है। राजनीतिक रूप से इस्तेमाल के लिए भाजपा ने काम किया। एसपीयू सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसका राजनीतिक इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मैंने उनसे (कंगना रणाैत) अभी-अभी कड़े सवाल पूछे हैं, लेकिन वह हमेशा महिला विरोधी रुख के पीछे छिपने की कोशिश करती हैं। ऐसे काम नहीं चलेगा। हिमाचल में 16 लाख बेटियां हैं, जिन्होंने नाम रोशन किया है। कहा कि हिमाचल प्रदेश में उनका मनोरंजन का समय अब पूरा हो चुका है। उन्होंने इतने बयान दिए हैं कि लोग सुनकर हंसे बिना नहीं रह सकते। वह कॉमेडियन कपिल शर्मा को अच्छी टक्कर दे रही हैं। मुझे लगता है कि उन्हें 4 जून के बाद मुंबई वापस जाकर फिल्में करनी चाहिए या फिर कॉमेडी शो शुरू कर सकती हैं।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कैप्टन विक्रम बत्रा हो या सौरभ कालिया, जिस तरह से उन्होंने देश के लिए, हिमाचल के लिए अपनी जान कुर्बान की है, अब समय आ गया है कि सेना में प्रदेश का अलग से प्रतिनिधित्व हो। मैं लोकसभा में इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से उठाऊंगा कि भारतीय सेना में हिमाचल प्रदेश की एक रेजिमेंट होनी चाहिए। मुझे पता है कि रक्षा क्षेत्र में राज्यों को प्रमुखता नहीं दी जाती है, लेकिन क्षेत्रीय आकांक्षाओं और उन सेवाओं में राज्य के युवाओं के उच्च प्रतिनिधित्व को देखते हुए अब समय आ गया है कि राज्य के लिए अलग से रेजिमेंट होनी चाहिए, ताकि उन लोगों को उचित सम्मान मिल सके जिन्होंने अपनी जान कुर्बान की है।

मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में शहजादे नहीं होते और न ही वह कोई शहजादे हैं। वे एक हिंदू और राजपूत हैं। यह बात उन्होंने मंडी में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में कही। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि आज पूर्व रियासतों के राज परिवारों के सबसे ज्यादा लोग भाजपा का हिस्सा हैं। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू के महाराजा महेश्वर सिंह, पटियाला के महाराजा, मैसूर के महाराजा, जयपुर की महारानी और ग्वालियर के महाराजा भाजपा में हैं। कंगना बीना किसी औचित्य के बातें कर रही हैं। हिमाचल में शहजादे नहीं होते।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।