db News Network

Home » टैलेंट ऑन स्टेज और डेम्स वेडिंग्स ने बदला वेडिंग इंडस्ट्री का चेहरा: सुभ्रांत दीक्षित की कहानी

टैलेंट ऑन स्टेज और डेम्स वेडिंग्स ने बदला वेडिंग इंडस्ट्री का चेहरा: सुभ्रांत दीक्षित की कहानी

0 comments 229 views 2 minutes read

नई दिल्ली। भोपाल: वेडिंग प्लानिंग की दुनिया में एक नया नाम तेजी से उभरा है – सुभ्रांत दीक्षित और उनकी टीम का टैलेंट ऑन स्टेज एंड डेम्स वेडिंग्स. लगभग 14-15 साल पहले एंकरिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सुभ्रांत ने इवेंट इंडस्ट्री में एक बड़ी कमी को महसूस किया – डेकोर के साथ सही मैनेजमेंट की. इसी सोच के साथ उन्होंने चार दोस्तों के साथ मिलकर “DEMS Weddings” की नींव रखी. सुभ्रांत का कहना है, “हमने वेडिंग को एक कॉर्पोरेट अप्रोच के साथ मैनेज करना शुरू किया, जहाँ हर चीज़ की डीटेलिंग होती है – टाइमिंग, इंट्री मैनेजमेंट, साउंड क्वालिटी, और प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन.” उनकी इस अप्रोच ने उन्हें भारत ही नहीं, विदेशों जैसे अमेरिका, दुबई, ऑस्ट्रेलिया से भी क्लाइंट्स दिलवाए हैं.

पंचमढ़ी से लेकर दुबई तक की सफल वेडिंग्स: सुभ्रांत की खास नजर

अपने अनुभवों को साझा करते हुए सुभ्रांत ने बताया कि पंचमढ़ी जैसी जगहों ने उनकी वेडिंग प्लानिंग को एक नया आयाम दिया. “कोविड के बाद जब इंटीमेट वेडिंग्स का चलन बढ़ा, तब पंचमढ़ी में जून-जुलाई के महीनों में हमने शानदार वेडिंग्स कीं, जहाँ मिनिमल डेकोर में भी एक अलग चार्म निकलकर आया.” भोपाल के आसपास खुले नए रिसॉर्ट्स ने भी डेस्टिनेशन वेडिंग्स को आसान और लोकप्रिय बना दिया है. उनका मानना है कि सोशल मीडिया ने वेडिंग प्लानर्स के लिए चुनौती जरूर बढ़ाई है, लेकिन जब क्लाइंट्स को डीटेल्ड इन्वेंटरी और ट्रस्टवर्दी आर्टिस्ट्स के साथ एक ही जगह पर सबकुछ मिलता है, तो उनका अनुभव बेहद यादगार बनता है.

वेडिंग प्लानिंग को बना रहे हैं भारतीय संस्कृति का वाहक

सुभ्रांत दीक्षित न सिर्फ एक सफल वेडिंग प्लानर हैं, बल्कि वे भारतीय वेडिंग कल्चर के सच्चे दूत भी हैं. वे कहते हैं, “हम सिर्फ शादी सजाते नहीं हैं, बल्कि रीति-रिवाज़ों की गहराई को समझाकर नई पीढ़ी को उससे जोड़ने की कोशिश करते हैं.” ‘गोधूलि वेला’ जैसे परंपरागत समय पर फेरे करवाने से लेकर संगीत और हल्दी में आर्टिस्ट्स की पूरी लाइनअप तैयार करना – हर पहलू को एक प्रोफेशनल लेकिन भावनात्मक टच देना ही उनकी पहचान है. वे मानते हैं कि वेडिंग इंडस्ट्री का भविष्य उज्ज्वल है, बशर्ते इसमें प्रोफेशनलिज़्म और अनुभव के साथ सही नॉलेज भी जोड़ी जाए. उनका सपना है कि आने वाले 5 वर्षों में उनकी कंपनी देश की अग्रणी वेडिंग प्लानिंग एजेंसियों में शुमार हो।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।