भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की उद्यमी रोहिनी पाटीदार पारंपरिक गुजराती लिपन आर्ट को आधुनिक अंदाज में नई पहचान दिला रही हैं। अपने स्टार्टअप “आरंभ” के माध्यम से वे घरों और व्यावसायिक स्थानों की दीवारों पर हस्तनिर्मित लिपन आर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य भारतीय पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और महिलाओं को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।
रोहिनी पाटीदार ने बताया कि उन्होंने अपने पहले उद्यम की शुरुआत के प्रतीक के रूप में अपने स्टार्टअप का नाम “आरंभ” रखा। शुरुआत में उन्होंने अपने घर की दीवारों पर लिपन आर्ट बनाया, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रदर्शनियों में अपने कार्य का प्रदर्शन किया, जहां से उन्हें सराहना और ऑर्डर दोनों मिलने लगे। समय के साथ लोगों ने एमडीएफ बोर्ड की बजाय सीधे अपने घरों की दीवारों पर लिपन आर्ट बनवाना शुरू किया। सोशल मीडिया और प्रदर्शनियों के माध्यम से आज उनके काम को लगातार नई पहचान मिल रही है।
रोहिनी ने बताया कि लिपन आर्ट मूल रूप से गुजरात के कच्छ क्षेत्र की पारंपरिक कला है, जो पहले मिट्टी और छोटे-छोटे शीशों की मदद से घरों की दीवारों को सजाने के लिए बनाई जाती थी। आधुनिक समय में इस कला में नए डिज़ाइन और तकनीकों का समावेश हुआ है, लेकिन इसकी बारीक कारीगरी आज भी उतनी ही मेहनत और धैर्य मांगती है। किसी भी दीवार पर लिपन आर्ट तैयार करने में लगभग तीन सप्ताह का समय लगता है, क्योंकि इसमें डिज़ाइनिंग, स्केच, क्ले वर्क, पेंटिंग और फिनिशिंग की कई चरणों वाली प्रक्रिया शामिल होती है। वर्तमान में रोहिनी अपनी भतीजी के साथ मिलकर इस स्टार्टअप को आगे बढ़ा रही हैं और बढ़ती मांग के साथ टीम का विस्तार करने की तैयारी भी कर रही हैं।
रोहिनी पाटीदार का मानना है कि किसी भी महिला की सफलता के लिए परिवार, विशेष रूप से दूसरी महिलाओं का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार महिलाओँ को समय और अवसर दे तो वे घर और करियर दोनों की जिम्मेदारियां सफलतापूर्वक निभा सकती हैं। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि सफलता के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं तय करना, समय का सही प्रबंधन करना और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की शुरुआत करना सबसे जरूरी है। उनके अनुसार भारतीय पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही “आरंभ” का सबसे बड़ा उद्देश्य है।





