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यूथ कांग्रेस का सोशल मीडिया पर दिखा शक्तिशाली प्रभाव, सामाज सेवा में निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका – मनु

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मनु बोले – भाजपा तीन राज्यों में मुख्यमंत्री भी तय नहीं कर पाई, और हमने तेलंगाना में कैबिनेट का गठन, गारंटी का इंप्लीमेंट शुरू करके किया जनादेश का सम्मान

नई दिल्ली। आज के समय में हमारे जीवन में सोशल मीडिया का खासा महत्व है, बल्कि सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। हर खबर, जानकारी हमें इसके माध्यम से सबसे पहले मिलती है। और कुछ ही मिनटों में वह खबर देश भर में फ़ैल जाती है। इसको लेकर डीबी न्यूज नेटवर्क से बात करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस सोशल मीडिया के नेशनल हैड मनु जैन ने क्या कुछ कहा, आइए आपको बताते हैं।

मनु जैन का मानना है कि सोशल मीडिया एक एयर फोर्स की तरह है। इंडियन नेशनल कांग्रेस की यह कोशिश है कि सोशल मीडिया पर कैसे ताकतवर बने उसी क्रम में यूथ कांग्रेस अपने आप को लगातार लगातार मजबूत कर रहा है। सोशल मीडिया और ऑर्गेनाइजेशन लेवल पर, मुझे करीब 5 साल से ज्यादा हो गए हैं सोशल मीडिया के साथ जुड़े हुए काफी कैंपेन में हमने काम किया चाहे वह कोरोना के दौरान SOSIYC कैंपेन हो, सरकार से सवाल पूछना हो, लगातार संगठन की गतिविधियों को हाईलाइट करना या चुनावो में काम करना हो। यहां बता दें मनु जैन की शुरुआत यूथ कांग्रेस सोशल मीडिया के विधानसभा संयोजक के तौर पर हुई थी और वह मध्यप्रदेश में बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले से आते हैं, परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं है लेकिन काम करते हुए आगे बढ़े और आज भारतीय युवा कांग्रेस सोशल मीडिया के नेशनल हैड हैं।

SOSIYC ने कोरोना काल में किया मदद कार्य

मनु जैन बताते हैं कि कोरोना काल जब हर आदमी परेशान था तब वह सोशल मीडिया के माध्यम से बस एक ट्वीट या पोस्ट करता था और SOSIYC के द्वारा हम हर संभव मदद के लिए तैयार रहते थे। कोरोना काल में हमें राहुल गांधी जी का निर्देश था कि हमें लोगो की हर संभव सहायता करनी है। कोरोना की पहली लहर में हमनें भारतीय युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी के नेतृत्व में हजारों मजदूरों को घर भेजने का काम किया, हम रोज करीब 15000 से 20000 ड्राई राशन किट देते थे। सिर्फ दिल्ली ही नहीं पूरे देश भर से कोई भी, किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मदद की गुहार लगाता था तो हम उनकी मदद करते थे। जब कोरोना का ग्राफ बढ़ना शुरू हुआ तो लोगों ने प्रधानमंत्री से मदद नहीं मांगी थी लोग SOSIYC श्रीनिवास को ट्वीट कर रहे थे और लोगों का भरोसा कोरोना के दौरान सरकार से टूट गया था।

जनादेश सर माथे, क्योंकि जनता ही जनार्दन है।

उन्होंने कहा कि जितने भी राज्यों में चुनाव हुए हमने वहां पर बहुत अच्छे से काम किया कई कई महीने हम और हमारी टीम वहां पर लगातार लगातार कम करें जिसके नतीजे हमें हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना में जीत मिली तो कुछ राज्यों में हम पीछे रहे लेकिन जानादेश का सम्मान है यह कहते हुए मनु जैन ने बताया जनता चाहे तो हमें कुर्सी में बैठा सकती है और जनता ने तय किया है कि हम इन राज्यों में अपोजिशन में बैठे तो जनादेश हमें स्वीकार है यह जनता का फैसला है और हमारे यहां जनता ही जनार्दन है। लेकिन आज 8 दिन हुए हैं और भारतीय जनता पार्टी अपने तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री तय नहीं कर पाई है और हमारे कैबिनेट का गठन भी हो गया है, और गारंटी का भी इंप्लीमेंट होना शुरू हो गया है।

आज की राजनीति में सोशल मीडिया की महत्ती भूमिका

मनु जैन बताते हैं पहले राजनीति बहुत ट्रेडिशनल तरीके से होती थी, ग्राउंड की राजनीति होती थी। उसी तरीके से मुद्दे उठाए जाते थे, पर अब सोशल मीडिया का युग है। इस युग में हमें सच और झूठ का निर्णय खुद लेना होगा। हमारे संगठन ने अपने आप को सोशल मीडिया की ताकत में काफ़ी मजबूत किया है। पर हमें स्वयं को पहचानना होगा कि कहीं हमें सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ तो परोसा नहीं जा रहा। जब हम इस सच और झूठ के अंतर को पहचानने में कामयाब होंगे तभी सोशल मीडिया सही मायने में मजबूत होगा। मनु ने यह भी कहा कि अगर आप हमारे माध्यम से देश के लिए कोई बात रखना चाहते हैं कोई सवाल करना चाहते हैं तो हमसे जुड़ सकते हैं। जरूरी नहीं कि आप कांग्रेस आईडियोलॉजी के ही हों, बस बात देश की होनी चाहिए, देश के लिए होना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।