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चक्रवाती तूफान दाना को लेकर अलर्ट, कई ट्रेनें रद

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नई ‘दिल्ली। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान दाना (Cyclone Dana) को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने भुवनेश्वर, पुरी, विशाखापट्टनम की ओर से आने वाली कई ट्रेनों को रद करने का निर्णय लिया है। इनमें से कई ट्रेनें ग्वालियर से होकर गुजरती हैं।तूफान का असर 23 से 25 अक्टूबर के बीच विशेष रूप से रहने की संभावना है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

ग्वालियर से गुजरने वाली ट्रेन क्रमांक 18478 योग नगरी ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस बुधवार को रद रहेगी। इसी प्रकार पुरी की ओर से आने वाली उत्कल एक्सप्रेस के साथ ही ट्रेन क्रमांक 08475 पुरी फेस्टिवल एक्सप्रेस को 24 अक्टूबर को रद किया गया है।
25 अक्टूबर को ट्रेन क्रमांक 20807 विशाखापट्टनम-अमृतसर हीराकुंड एक्सप्रेस को रद किया गया है। वहीं 26 अक्टूबर को निजामुद्दीन से पुरी जाने वाली फेस्टिवल एक्सप्रेस को रद किया गया है।

रेलवे ने पूर्व में 23 से 26 अक्टूबर के बीच ट्रेन क्रमांक 11123 ग्वालियर-बरौनी मेल को रद किया था, लेकिन अब यह बुधवार और गुरुवार को नियमित संचालित होगी। इसी प्रकार ट्रेन क्रमांक 11124 बरौनी-ग्वालियर को 24 से 27 अक्टूबर तक रद किया गया था, लेकिन अब यह ट्रेन 24 व 25 अक्टूबर को नियमित समय से चलेगी।
छत्तीसगढ़ में भी असर, 15 ट्रेनें रद

इसी तरह दाना के चलते रेलवे ने छत्तीसगढ़ में 15 ट्रेनों को रद कर दिया है। छत्तीसगढ़ ओडिशा से सटा हुआ राज्य है। लिहाजा यहां भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस लिहाज से परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा।

छत्तीसगढ़ में दाना चक्रवाती तूफान को लेकर रेलवे विभाग अलर्ट पर है। इसी वजह से कुछ तिथियों में ट्रेनों को रद करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर है। हालांकि ट्रेनें रद रहने से यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

दीपावली पर्व पर यात्रियों ने बड़ी संख्या में रिजर्वेशन कराया है, ताकि पर्व पर घर जा सके। लेकिन, रेलवे के रद के निर्णय की वजह से उन्हें घर पहुंचने में परेशानी आएगी।

ये रहेगी रद
23 अक्टूबर को 18478 ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 18477 पुरी-ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस
25 अक्टूबर को 20807 विशाखापत्तनम-अमृतसर हीराकुंड एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 22865 एलटीटी पुरी एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 18426 दुर्ग – पुरी एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 09060 ब्रह्मपुर- सूरत एक्सप्रेस
29 अक्टूबर को 20824 अजमेर-पुरी एक्सप्रेस
23 अक्टूबर को 09059 सूरत- ब्रह्मपुर एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 18425 पुरी-दुर्ग एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 20823 पुरी-अजमेर एक्सप्रेस
26 अक्टूबर को 12844 अहमदाबाद-पुरी एक्सप्रेस
24 अक्टूबर को 12843 पुरी-अहमदाबाद एक्सप्रेस
5 अक्टूबर को 08475 पुरी-निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।