भोपाल के उभरते हुए फिल्म निर्देशक मानव सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर की, लेकिन उनका रुझान सिनेमा के तकनीकी पक्षों की ओर बचपन से ही रहा। डीबी न्यूज नेटवर्क से बातचीत में उन्होंने बताया कि किस तरह शुरुआती संघर्षों, इवेंट्स और खुद की मेहनत से उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनानी शुरू की। आज वे कई प्रमुख हिंदी और गुजराती फिल्मों में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर चुके हैं और खुद के प्रोजेक्ट्स पर भी सक्रिय हैं।
मानव सिंह ने स्टूडियो नाइन में ग्राफिक डिजाइनिंग के ज़रिए अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की, जहां वे पोस्टर्स, बैनर और लोगो जैसे डिजाइन तैयार करते थे। इसके बाद उन्होंने IST जैसे प्रतिष्ठित इवेंट में भाग लिया और वहीं से उन्हें निर्देशन और लेखन की प्रेरणा मिली। लॉकडाउन के समय उन्होंने अपने पहले प्रोजेक्ट पर एक टीम के साथ काम करते हुए टॉप 500 में जगह बनाई, जो उनके लिए करियर की दिशा तय करने वाला पल साबित हुआ।
मानव सिंह ने ‘गुलाब जल’ जैसी हिंदी फिल्म के साथ-साथ गुजराती फिल्मों ‘दी टेरेस’ और ‘रघु रोमियो’ में भी सह-निर्देशक के रूप में योगदान दिया है। इसके अलावा वे स्टार प्रवाह के मराठी शो ‘छोटे उस्ताद’ और प्रकाश झा की वेब सीरीज़ ‘आश्रम 2’ में भी शामिल रहे हैं। वे ज्यादातर फर्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर की भूमिका निभाते हैं, जिससे उन्हें फिल्म निर्माण की गहराई तक सीखने का मौका मिलता है। उनका मानना है कि सेट पर सीखना ही सच्ची फिल्मी शिक्षा है।
फिल्मों के अलावा मानव खुद के यूट्यूब चैनलों और प्रोजेक्ट्स पर भी काम करते हैं, जहां वे सिनेमैटिक व्लॉग्स, म्यूजिक वीडियोज और स्क्रिप्टेड फिटनेस ब्लॉग्स बनाते हैं। वे मानते हैं कि बॉलीवुड को नए चेहरे, मजबूत लेखन और मौलिक कॉन्टेंट की जरूरत है। उनका विश्लेषण है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बॉलीवुड का प्रदर्शन बेहतर रहा है क्योंकि वहां रचनात्मक स्वतंत्रता और दर्शकों की सहजता दोनों मिलती हैं। आने वाले वर्षों में वे खुद को संजय लीला भंसाली की तरह बड़े निर्देशक के रूप में देखना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि दर्शकों का प्यार उन्हें भी उसी तरह मिलेगा।





