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BJP पर धमकाने का आरोप, केजरीवाल ने चुनाव आयुक्त से शिकायत

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नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने आज मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। केजरीवाल ने अपने पत्र में दावा किया है कि नई दिल्ली विधानसभा में AAP कार्यकर्ताओं को भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से धमकाया और परेशान किया जा रहा है। केजरीवाल ने इलेक्शन कमिश्नर को लिखे पत्र में दिल्ली पुलिस की भी शिकायत की है। केजरीवाल ने चुनाव आयोग से दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की भी मांग की है। अरिवंद केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया और बीएनएसएस,2023 की धारा 126 के तहत निराधार और झूठे आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

केजरीवाल ने पत्र में क्या-क्या लिखा?
अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि मैं चुनाव के दिन से पहले नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस की ओर से हमारे जमीनी स्तर के स्वयंसेवकों को दी जा रही धमकी और उत्पीड़न पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करने के लिए लिख रहा हूं। कल,हमारे वरिष्ठ स्वयंसेवक चेतन (प्रिंसेस पार्क पार्ट-2 के निवासी) को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में BNSS, 2023 की धारा 126 के तहत मामला दर्ज किया गया। इस आधार पर कि उनके खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं, जबकि ऐसा कोई मामला नहीं है। उन पर बेशर्मी से ऐसे आरोप लगाए गए जो उन्होंने कभी किए ही नहीं। पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें इस हद तक गंभीर शारीरिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा कि वे बेहोश हो गए और बाद में उन्हें लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया। बाद में काफी संघर्ष के बाद उन्हें संबंधित रिटर्न ऑफिसर/SDM के सामने पेश किया गया और जमानत दे दी गई,जिस मामले में उन्हें बेशर्मी से फंसाया गया था।

झूठे केस में फंसाया गया- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि एक अन्य समान घटना में,हमारे वरिष्ठ स्वयंसेवक श्री ओम प्रकाश (निवासी जोधपुर मेस, पांडारा रोड) को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन से फोन आया और उन्हें पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने के लिए कहा गया क्योंकि एसएचओ उनसे बात करना चाहते थे। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया और बीएनएसएस, 2023 की धारा 126 के तहत निराधार और झूठे आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया कि उनके खिलाफ पहले से मामले दर्ज हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। बाद में बहुत संघर्ष के बाद,उन्हें संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर/एसडीएम के समक्ष पेश किया गया और जमानत दी गई, जबकि उन्हें खुलेआम और स्पष्ट रूप से फंसाया गया था।

केजरीवाल ने की चुनाव आयोग से ये मांग
केजरीवाल ने अपने पत्र में आगे लिखा कि दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए जाने चाहिए कि हमारे स्वयंसेवक चुनाव के दिन उत्पीड़न या गलत तरीके से हिरासत में लिए जाने के डर के बिना स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। मैं अपने प्रमुख जमीनी स्तर के स्वयंसेवकों की एक सूची संलग्न कर रहा हूं जिन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए,क्योंकि उन्हें हाल के दिनों में भाजपा कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस ने निशाना बनाया है। हम आग्रह करते हैं कि उन्हें दिल्ली पुलिस के अलावा अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि हम मांग करते हैं कि जिन पुलिस अधिकारियों ने इस असंवैधानिक और अवैध तरीके से और अपने कर्तव्यों की पूर्ण अवहेलना में काम किया है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। चुनाव आयोग को उन कानून प्रवर्तन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके एक उदाहरण पेश करना चाहिए जो हमारे स्वयंसेवकों को डराने या दबाने के लिए राजनीतिक दबाव में काम करते पाए जाते हैं। हमारे स्वयंसेवकों पर हमला करने और धमकाने में शामिल व्यक्तियों को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 170 और 171 और चुनाव कानूनों के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।