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सीएम सरमा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा, कहा- अर्थव्यवस्था की जानकारी नहीं

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नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल की केंद्रीय बजट पर की गई टिप्पणी को राजनीति से प्रेरित बताया। सरमा ने कहा कि उन्हें देश की अर्थव्यवस्था के बारे में ‘शून्य ज्ञान’ है।

बता दें कि राहुल गांधी ने केंद्रीय बजट को ‘गोली के घावों पर पट्टी’ करार दिया और कहा कि केंद्र ‘विचारों के मामले में दिवालिया’ है। राहुल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘गोली के घावों पर पट्टी! वैश्विक अनिश्चितता के बीच, हमारे आर्थिक संकट को हल करने के लिए एक आदर्श बदलाव की आवश्यकता है।’

कर छूट सीमा नहीं बढ़ाने के लिए कांग्रेस की आलोचना की
इसके बाद, सीएम सरमा ने गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने 60 साल के शासन के दौरान कर छूट की सीमा नहीं बढ़ाने के लिए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को केंद्रीय बजट की बिलकुल भी आलोचना नहीं करनी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि उन्होंने मध्यम वर्ग के लोगों को कितनी राहत दी है। 60 साल के शासन के बाद, उन्होंने 5 लाख रुपये तक की राहत भी नहीं दी।’

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणियां राजनीति से प्रेरित हैं। इससे पता चलता है कि राहुल को देश की अर्थव्यवस्था के बारे में बिलकुल भी जानकारी नहीं है।

कांग्रेस सरकार में सिर्फ 3 लाख तक पहुंची आयकर छूट सीमा
सीएम सरमा ने कहा कि केंद्र में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी, तब आयकर छूट की सीमा सिर्फ 3 लाख रुपये तक ही पहुंच पाई थी। जबकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निम्न से लेकर उच्च मध्यम वर्ग के सभी लोगों को राहत दी है। सीएम सरमा ने कहा कि वित्त मंत्री ने राज्यों को अधिक कर हस्तांतरण भी आवंटित किया है। इस बजट में सभी के लिए कुछ न कुछ है।

सीएम सरमा ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने शुरुआत में कर छूट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये और फिर बाद के बजट में 7 लाख रुपये कर दी।

अगले वित्त वर्ष में असम को मिलेंगे 44500 करोड़ रुपये
सीएम ने यह भी कहा कि असम को अगले वित्त वर्ष में केंद्र से कर हस्तांतरण के रूप में 44,500 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो चालू वित्त वर्ष में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है। सीएम ने यह भी दावा किया कि केंद्र 25-26 फरवरी को होने वाले एडवांटेज असम 2.0 शिखर सम्मेलन से पहले पूर्वोत्तर राज्य को लाभ पहुंचाने के लिए लगभग 5-6 नीतिगत उपायों की घोषणा करेगा।

वेतनभोगी वर्ग के लिए अतिरिक्त 75 हजार की मानक कटौती
वित्त मंत्री सीतारमण ने लगातार आठवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। जिसके अनुसार, एक वर्ष में 12 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों को छूट सीमा को 7 लाख रुपये से बढ़ाने के बाद कोई कर नहीं देना होगा। वेतनभोगी वर्ग के लिए अतिरिक्त 75,000 रुपये की मानक कटौती की गई है।

25 लाख की आय वाले 1.1 लाख रुपये की बचत कर सकेंगे
वित्त मंत्री सीतारमण ने इस सीमा से ऊपर की आय वाले लोगों के लिए कर स्लैब में भी बदलाव किया, जिससे एक वर्ष में 25 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को कर में 1.1 लाख रुपये तक की बचत करने में मदद मिलेगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।