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मुडा घोटाले में लोकायुक्त के सामने पेश होंगे सीएम सिद्धारमैया

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नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुडा घोटाले के मामले में लोकायुक्त के सामने पेश होने की पुष्टि कर दी है। लोकायुक्त ने घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए सीएम सिद्धारमैया को समन जारी किया था। मंगलवार को सीएम हुबली धारवाड़ इलाके में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या वे लोकायुक्त के सामने पेश होंगे तो इस पर सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि ‘मैं कल सुबह 10 बजे जा रहा हूं’।

मुख्यमंत्री की पत्नी से भी हो चुकी है पूछताछ
लोकायुक्त पुलिस ने सीएम सिद्धारमैया को समन जारी कर 6 नवंबर को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा था। इससे पहले सीएम की पत्नी पार्वती से इस मामले में 25 अक्तूबर को पूछताछ हो चुकी है। साथ ही पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी और देवाराजू से भी पूछताछ हुई है। देवाराजू से ही मल्लिकास्वामी ने जमीन खरीदकर अपनी बहन पार्वती को उपहार स्वरूप दी थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है और कहा है कि विपक्ष उनसे डरा हुआ है, जिसकी वजह से उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। मुडा घोटाले के मामले में ईडी ने भी मुडा के पूर्व आयुक्त डीबी नातेश से पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद पूर्व आयुक्त को हिरासत में लिया गया था। ईडी इस मामले में धन शोधन के कोण से जांच कर रही है।

मुडा घोटाले में सीएम सिद्धारमैया की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। अब कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी सीएम को नोटिस जारी किया है। दरअसल कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा द्वारा दायर रिट याचिका पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और अन्य को नोटिस जारी किया है। याचिका में MUDA घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश देने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बी एम, उनके रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी, भारत संघ, राज्य सरकार, सीबीआई और लोकायुक्त को भी नोटिस जारी किया। उन्होंने लोकायुक्त को मामले में अब तक की गई जांच को रिकॉर्ड में पेश करने का निर्देश दिया। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 26 नवंबर को करेगी।

मुडा (मैसूर अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी) घोटाला करीब 3.2 एकड़ जमीन के घोटाले से जुड़ा है। इस जमीन के एवज में मुडा ने सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को प्लॉट आवंटित किए थे। आरोप है कि इन प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितता बरती गई। दरअसल मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने साल 2010 में 3.2 एकड़ जमीन उपहार स्वरूप दी थी। बाद में यह जमीन मुडा द्वारा किए गए जमीन अधिग्रहण के दायरे में आ गई। जमीन अधिग्रहण के बदले पार्वती ने मुआवजे की मांग की तो मुडा ने उन्हें 14 प्लॉट आवंटित कर दिए। आरोप है कि ये प्लॉट मूल भूमि की कीमत से काफी ज्यादा कीमत के थे। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कथित घोटाला तीन से चार हजार करोड़ का हो सकता है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।