db News Network

Home » अमित शाह के सवाल उठाने पर मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार

अमित शाह के सवाल उठाने पर मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार

0 comments 57 views 2 minutes read

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। पहले शाह ने खरगे को पीएम मोदी के खिलाफ बयानबाजी करने को लेकर घेरा। वहीं अब खरगे ने पलटवार किया है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक अखबार की रिपोर्ट को साझा करके अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को मणिपुर, सेंसस और जातिगत जनगणना जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘आपकी सरकार का ही सर्वे कहता है कि शहरी सीवरों, सेप्टिक टैंकों की सफाई करने वाले 92 फीसदी कर्मचारी एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों से आते हैं।’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘भाजपा जातिगत जनगणना के विरोध में इसलिए है क्योंकि तब पता चल जाएगा कि एससी, एसटी, ओबीसी, ई़डब्ल्यूएस व सभी वर्ग कौन-कौन से कार्यों से अपना जीवन-यापन कर रहें हैं। उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है? उनको किस तरह की सरकारी योजनाओं का लक्षित लाभ मिलना चाहिए। कांग्रेस पार्टी जातिगत जनगणना करवाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है। हम ये करवाकर ही रहेंगे।’

दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाए बिना मरने वाला नहीं हूं’ बयान पर सियासी विवाद गहरा गया है। अमित शाह ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अरुचिकर और अपमानजनक व्यवहार करके खुद अपने नेताओं और अपनी पार्टी को पीछे छोड़ दिया है।

भाजपा नेता अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा था, ‘कल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने भाषण में अपमानजनक बातें कहकर खुद अपने नेताओं और अपनी पार्टी को पीछे छोड़ दिया है। अपनी कटुता का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने बेवजह प्रधानमंत्री को अपने निजी स्वास्थ्य मामलों में यह कहकर घसीटा कि वह पीएम मोदी को सत्ता से हटाने के बाद ही मरेंगे।’

उन्होंने कहा था, ‘इससे पता चलता है कि कांग्रेस के लोगों को पीएम मोदी से कितनी नफरत और डर है कि वे लगातार उनके बारे में सोचते रहते हैं। जहा तक खरगे के स्वास्थ्य की बात है पीएम मोदी, मैं और हम सभी प्रार्थना करते हैं कि वे लंबे समय तक स्वस्थ रहें। वे कई वर्षों तक जीवित रहें और 2047 तक विकसित भारत का निर्माण देखने के लिए जीवित रहें।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।