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केजरीवाल पर संदीप दीक्षित का हमला, देश को तुझसे बचाने की जरूरत

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी पार्टी को बचाने के लिए लड़ रहे हैं, जबकि मेरी लड़ाई देश बचाने की है। उनके इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित भड़क गए हैं। नाराज दीक्षित ने सोशल मीडिया पर केजरीवाल पर बरसते हुए कहा कि ‘तुझे देश बचाने की नहीं, देश को तुझसे से बचाने की जरूरत है।

दीक्षित ने केजरीवाल से सोनिया गांधी को जेल भेजने, लोकपाल के नाम पर देश को बेवकूफ बनाने, शीला दीक्षित के बारे झूठ फैलाने, अय्याशी के लिए महल बनाने, विज्ञापनों पर हजारों करोड़ खर्च करने, शराब की दलाली करने जैसे 13 सवाल पूछते हुए कहा कि सवालों की इतनी बड़ी लिस्ट है कि लोग पढ़ते-पढ़ते थक जाएं। दीक्षित ने लिखा कि क्या इन सब कामों को करते हुए तुम देश बचा रहे थे।

नई दिल्ली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘अरविंद केजरीवाल… देश बचाने चले हो?’ इसके बाद उन्होंने 13 सवाल पूछे।

संदीप दीक्षित बोले- ये सब करते हुए देश बचा रहे थे
🔹 जब शीला जी के बारे में बेशर्मी से 1000 झूठ फैला रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब सोनिया गांधी जी को जेल भेजने की धमकी दे रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब अन्ना के साथ लोकपाल के नाम पर देश को बेवकूफ बना रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब 34 करोड़ के अय्याश महल में गुलछर्रे उड़ा रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब 7 लाख के स्कूली कमरे 24 लाख में बनवा रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब विज्ञापनों पर हजारों करोड़ उड़ा रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब शराब की दलाली करके 2000 करोड़ डकार रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब कोविड के दौरान लोग ऑक्सीजन और बेड के लिए तड़प रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब पराली जलाने का ठीकरा किसानों पर फोड़ रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब यमुना को साफ़ करने का झूठा वादा कर रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब कांग्रेस और शीला जी के किए गए हर काम को बिना शर्म अपने नाम पर बता रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब झूठे एफिडेविट से जनता के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

🔹 जब हर राज्य चुनाव में कांग्रेस के वोट काटकर बीजेपी को जिता रहे थे, तो देश बचा रहे थे?

इन 13 सवालों के अंत में दीक्षित ने लिखा, ‘इतनी बड़ी लिस्ट है कि लोग पढ़ते-पढ़ते थक जाएं। तुझे देश बचाने की नहीं, देश को तुझसे से बचाने की जरूरत है।’

राहुल ने कहा था- केजरीवाल भी पीएम की तरह झूठे वादे करते हैं
दरअसल सोमवार को सीलमपुर इलाके में कांग्रेस की एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केजरीवाल पर जुबानी तीर चलाए थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का आगाज करते हुए राहुल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला किया था और दावा किया था कि आम आदमी पार्टी के संयोजक भी प्रधानमंत्री की तरह ही प्रचार-प्रसार तथा झूठे वादे करने की रणनीति पर अमल करते हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केजरीवाल दोनों चाहते हैं कि पिछड़े वर्ग, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों को भागीदारी नहीं मिले, इसलिए वे जाति जनगणना पर खामोश हैं।

राहुल गांधी के हमलों का केजरीवाल ने दिया था जवाब
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के जोरदार हमलों के कुछ देर बाद ही दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी थी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर उन्हें गालियां देने का आरोप लगाया था। इस दौरान केजरीवाल ने कहा था, ‘आज राहुल गांधी जी दिल्ली आए। उन्होंने मुझे बहुत गालियां दीं। पर मैं उनके बयानों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। उनकी लड़ाई कांग्रेस बचाने की है, मेरी लड़ाई देश बचाने की है।’

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।