मध्य प्रदेश के इंदौर से फैशन इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना चुके शुभ परमार, ‘ओरा – द एथनिक बुटीक’ के संस्थापक हैं। एक छोटे से कस्बे देपालपुर से निकलकर, शुभ ने अपने जुनून और कठिन परिश्रम से न केवल खुद का लेबल स्थापित किया, बल्कि समाज में फैशन को लेकर धारणा बदलने का भी बीड़ा उठाया। 2012 में फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई शुरू कर 2015 में IFT से डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने “ओरा” नाम से अपने डिजाइनिंग सफर की शुरुआत की।
देपालपुर में डिज़ाइनर को टेलर समझा जाता था
शुभ का कहना है कि देपालपुर जैसे छोटे शहरों में आज भी फैशन डिज़ाइनर को केवल “लेडीज़ टेलर” के रूप में देखा जाता है। इस सोच को बदलने के लिए उन्होंने एक सरकारी मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान की शुरुआत की, जहाँ हाउसवाइफ्स और युवतियों को सिलाई, कटिंग, पैटर्न मेकिंग और पारंपरिक फैब्रिक्स की पहचान जैसे विषयों में प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने ब्लाउज डिज़ाइन्स के विभिन्न प्रकार सिखाकर वहां की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
“ओरा” सिर्फ एक ब्रांड नहीं, एक आंदोलन है
आज शुभ परमार न केवल सफल बुटीक चला रहे हैं, बल्कि इंदौर में एक इंस्टिट्यूट के ज़रिए नए डिज़ाइनर्स को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं। वे महेश्वरी और चंदेरी जैसे पारंपरिक वस्त्रों को भी प्रमोट कर रहे हैं। उनका सपना है कि आने वाले समय में वह बॉलीवुड के लिए डिज़ाइन करें और एक ऐसा फैशन संस्थान खोलें जहाँ मिडिल क्लास के बच्चे भी कम फीस में उच्च गुणवत्ता की फैशन शिक्षा प्राप्त कर सकें। शुभ की कहानी इस बात का प्रमाण है कि छोटे शहरों से भी बड़ा परिवर्तन शुरू हो सकता है।





