नई दिल्ली। यात्रा सिर्फ मंज़िल तक पहुँचने का ज़रिया नहीं, बल्कि अनुभवों को समेटने और संस्कृति को समझने का माध्यम बन सकती है—इसी सोच के साथ सोनिया वांजा ने अपने यूट्यूब चैनल “यात्री सेंट्स” की शुरुआत की। इवेंट मैनेजमेंट और बॉलीवुड प्रोडक्शन से जुड़कर देश-विदेश में काम कर चुकीं सोनिया को हमेशा यह इच्छा रही कि वे जहाँ भी जाएं, वहाँ की संस्कृति, लोकगीत और कहानियों को खुद कैप्चर करें। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इस सोच को आकार दिया और चारधाम यात्रा से अपने चैनल की शुरुआत की। उनके कंटेंट में न सिर्फ ट्रैवेल व्लॉग हैं, बल्कि हर राज्य की भाषा, संगीत और भावनाओं को दर्शाने वाले मूल गीत और संवाद भी शामिल हैं।
हर राज्य में दिखती विविधता, लेकिन महसूस होती एकता
सोनिया ने उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत समेत कई राज्यों का दौरा किया है और उनका मानना है कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। खानपान, पहनावा और बोली अलग होते हुए भी हर जगह “अतिथि देवो भव” की भावना उन्हें देखने को मिली। भाषा और धर्म को लेकर जो सामाजिक बहसें चलती हैं, सोनिया उन्हें व्यर्थ मानती हैं। उनका कहना है कि संस्कृति का मूल आधार एक है, और हर क्षेत्र के लोग जब खुले दिल से मिलते हैं, तो किसी भी भौगोलिक या भाषाई सीमा का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उनका अनुभव यही कहता है कि “खूबसूरती देखने वाले की आँखों में होती है।”
अब लक्ष्य है कैलाश और झारखंड जैसे क्षेत्रों को करीब से समझना
भविष्य में सोनिया की योजना है कैलाश यात्रा करने की और झारखंड जैसे पूर्वी राज्यों को गहराई से एक्सप्लोर करने की। वे अधिकतर यात्रा में स्थानीय टीमों के साथ काम करती हैं, जिससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलता है और संस्कृति का असली रंग भी उभर कर सामने आता है। एक महिला सोलो ट्रैवलर के रूप में सोनिया मानती हैं कि सुरक्षा ज़रूरी है, लेकिन आज भारत के कई हिस्से महिलाओं के लिए बेहद सुरक्षित और सहयोगी हैं। सोनिया वांजा की “यात्री सेंट्स” सिर्फ एक चैनल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को समझने की एक सुंदर पहल है।





