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सीबीएसई बोर्ड एग्जाम नजदीक, स्टूडेंट्स कर रहे कड़ी मेहनत… एक्सपर्ट्स ने दिए सुझाव

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जानिए क्या कहा उन्होंने…

पूरा सिलेबस ध्यान से पढ़े
मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले से आने वाले इकोनॉमिक्स सब्जेक्ट के एक्सपर्ट
शशांक कपूर का कहना है कि बोर्ड एग्जाम्स में अभी की हुई मेहनत आपको जीवन भर फल देती है। इसलिए स्टूडेंट्स एनसीईआरटी बेस्ड पूरा सिलेबस ध्यान से पढ़े, मैक्रो इकोनॉमिक्स एवं इंडियन इकोनॉमिक्स की दोनो बुक्स का ध्यान से अध्यन करें, न्यूमेरिकल्स की अच्छे से प्रैक्टिस करें। लास्ट ईयर के मॉक पेपर्स, सैंपल पेपर्स की प्रैक्टिस करें। जिससे स्टूडेंट्स को बेहतर अभ्यास हो सकेगा और बेहतर परिणाम आएगा। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स गैजेट्स का जरूरत अनुसार ही इस्तेमाल करें, हो सकते तो पैरेंट्स बच्चों को की-पैड मोबाइल ही इस्तेमाल करने दें।

उन्होंने स्टूडेंट्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस वक्त की मेहनत आपको जीवन भर याद रहेगी, इसलिए डट कर मेहनत करें और बेहतर परिणाम लाएं।

सैंपल पेपर्स और रेगुलर स्टडी पर फोकस जरूरी।

वहीं ग्वालियर के विज्ञान विषय के भौतिक शास्त्र एवं इलेक्ट्रोनिक यांत्रिकी के एक्सपर्ट संदीप प्रधान का कहना है कि सभी स्टूडेंट्स रेगुलर स्टडी पर ज्यादा फोकस करें, सैंपल पेपर्स का अच्छे से अध्यन करें। एनसीईआरटी की बुक से ही सवाल पूछे जाते हैं तो बुक का अच्छे से अध्यन करें। और तनाव को अपने से कोसों दूर रखें, प्रॉपर डाइट लें और खुद पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि रेगुलर स्टडी से अच्छे मार्क्स अवश्य स्कोर किए जा सकते हैं।

संदीप ने कहा कि स्टूडेंट्स को एग्जाम टाइम में खुद पर और खुद की स्टडी पर ही ध्यान देना चाहिए जिससे परिणाम बहुत बेहतर आएंगे।

क्वेश्चंस, एग्जांपल और फॉर्मूला की अच्छे से प्रैक्टिस करें।

ग्वालियर की ही मैथ्स सब्जेक्ट की एक्सपर्ट कीर्ति चौधरी के अनुसार एनसीईआरटी बुक का ध्यान से अध्यन करें, बुक में दिए गए क्वेश्चंस, एग्जांपल और फॉर्मूला की अच्छे से प्रैक्टिस करें। अपने डर को हटाएं और कॉन्फिडेंट रहें।

सैंपल पेपर्स की प्रैक्टिस टाइम लिमिट के साथ करें, जिससे आपको टाइम मैनेजमेंट करना भी आएगा, मोबाइल से थोड़े टाइम के लिए दूरी बना कर रखें, क्योंकि यह एग्जाम आपका पूरा भविष्य तय करेगा। तो पूरे कंसंट्रेशन के साथ स्टडी करें। ध्यान रखिए पूरे एग्जाम टाइम में आप और आपकी स्टडी पर फोकस रखना ही काम।आएगा।

रेगुलर रीडिंग से कंसंट्रेशन बढ़ाएं।

ग्वालियर की इंग्लिश लैंग्वेज एक्सपर्ट तीर्था भट्टाचार्य के अनुसार स्टूडेंट ज्यादा से ज्यादा पेपर सॉल्व करें, पेपर सॉल्व करने से स्टूडेंट्स का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और अच्छे मार्क्स स्कोर कर पाएंगे।

न्यूज पेपर्स पढ़ें, स्टोरीज पढ़ें, एनसीईआरटी के पास्ट पेपर्स पढ़े, हो सके तो टाइमर लगाएं जिससे समय का ध्यान रहेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। उन्होंने स्टूडेंट्स को ये भी कहा की मोबाइल और गैजेट्स का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करें।

तीर्था ने कहा कि एग्जाम टाइम में आप खुद पर फोकस करें और कढ़ी मेहनत से परिणाम खुद तय करें।

एग्जाम पेपर टफ नहीं बल्कि ट्रिकी हो सकता है।

अनुराग कुकरेजा जो की अकाउंटेंसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट हैं, उनका कहना हैं कि अकाउंटेंसी सब्जेक्ट में बेहतर स्कोर करने के लिए टेक्स्ट बुक में से क्वेश्चन सॉल्व करें, टेक्स्ट पेपर्स सॉल्व करें और सैंपल पेपर्स भी सॉल्व करें, क्योंकि एग्जाम पेपर टफ नहीं बल्कि ट्रिकी होता है।

अनुराग ने कहा कि स्टूडेंट्स अपनी मिस्टेक्स को मिनीमायिज करें, अपना बेस्ट दें। उन्होंने कहा रेगुलर प्रैक्टिस करें, जब आप प्रैक्टिस करेंगे तो डाउट भी आयेंगे, अगर कोई डाउट आए तो तुरंत अपने टीचर से क्लियर करें। डाउट क्लियर करने से ही सब्जेक्ट में आपकी ग्रोथ होगी और कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। और एग्जाम में वेल परफॉर्म कर पाएंगे।

पूरे सिलेबस को ध्यान से पढ़े, एग्जाम में मैप की प्रॉपर लोकेशन लगाएं।

अरविंद गुर्जर जो की ह्यूमैनिटीज के एक्सपर्ट हैं, उनका कहना है कि स्टूडेंट्स पूरे सिलेबस को ध्यान से पढ़े और उसके मार्क्स डिस्ट्रीब्यूशन पर अधिक ध्यान से की किस चैप्टर को कितना वैटेज दिया गया है। सैंपल पेपर का अच्छे ध्यान करें, जियोग्राफी में एमसीक्यू देखें, मैप को देखें यह सब आपके अच्छे स्कोर को कुंजी बनेगा।

उन्होंने कहा कि सीबीएसई का सैंपल पेपर स्टूडेंट्स लिए बेहद उपयोगी है। साथ ही सीबीएसई द्वारा पास्ट पेपर्स को अच्छे से सॉल्व कर लें, जो स्टूडेंट्स के लिए जरूरी भी है। और एग्जाम में मैप की प्रॉपर लोकेशन लगाएं, बड़ा गोला लगाएं।

ग्वालियर की ही डॉ सारिका ठाकुर “जागृति” जो की एक लेखिका और कवि हैं, उन्होंने कहा कि एक सफल विद्यार्थी जीवन के कुछ मूल मंत्र होते हैं। हमें अपने शिक्षकों को आदर्श मानते हुए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

आत्मविश्वासी बने
हमारे जीवन में आत्मविश्वास का होना बेहद जरूरी है। विपरीत समय में आपका आत्मविश्वास ही आपको उचित दिशा देगा।

बड़ा सपना देखिए
कहा जाता है कि हम अपने व्यवहार के अनुसार ही अपने जीवन को जीते हैं, और जीवन में कुछ बड़े सपने भी देखते हैं। अपने सपने को हकीकत करने के लिए जागते हुए उसे पूरा कीजिए और जीवन में सफलता प्राप्त कीजिए।

हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहें।
स्टूडेंट लाइफ जुनूनी होती है, अपने जुनून को सकारात्मक कार्यों में लगाइए। और हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहें एवं अपनी उड़ान को नए पंख और मजबूती दें।

सफलता के लिए कठिन परिश्रम आवश्यक
यदि हम विद्यार्थी जीवन में हैं तो हमें कठिन परिश्रम करना आना चाहिए, इस दौरान हम जितनी मेहनत करेंगे उसका नतीजा उतना ही अच्छा मिलेगा। याद रखिए, कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त करने का अपना अलग मजा है।

सहयोगी की भावना
आवश्यकता पड़ने पर यदि आप किसी साथ खड़े हैं तो वह भी आपका विपरीत परिस्थिति में सहयोग करेंगे। जीवन में कुछ भी अकेले प्राप्त नहीं किया जा सकता, इसलिए सहयोगी बनिए, सहयोग कीजिए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।