db News Network

Home » साइकोलॉजिस्ट गौरव गिल ने बताया स्टूडेंट्स कैसे एग्जाम टाईम में स्ट्रेस से बचें और कैसे नेगेटिव थॉट्स को कंट्रोल कर सफलता हासिल करें

साइकोलॉजिस्ट गौरव गिल ने बताया स्टूडेंट्स कैसे एग्जाम टाईम में स्ट्रेस से बचें और कैसे नेगेटिव थॉट्स को कंट्रोल कर सफलता हासिल करें

0 comments 387 views 2 minutes read

नई दिल्ली। स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम्स का टाइम शुरू होने वाला है। और इसी को लेकर कई बार स्टूडेंट्स परेशान भी हो जाते हैं की कैसे करें तैयारी जिससे कि एग्जाम्स में अच्छे मार्क्स आ सकें। इसी कड़ी में हमने दिल्ली के साइकोलॉजिस्ट गौरव गिल से बात की, जानिए क्या कुछ कहा उन्होंने।

उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स को स्ट्रेस मैनेज करने के लिए सकारात्मक सोच और तनाव से खुद को दूर रखने की आवश्यकता है। सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना हमारे मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है। तनाव को संभालने के लिए माइंड को एक फ्यूचर प्रीडेक्टिव मशीन की तरह सोचने की बजाय, वर्तमान क्षण में रहने की महत्वपूर्णता को समझने की जरूरत है। गौरव गिल ने दो नर्वस सिस्टम के बारे में बताया जिसमें पहला सिंपैथेटिक (Stress) और दूसरा पैरासिंपैथेटिक (Peace), उन्होंने बताया कि अगर आपको बहुत स्ट्रेस हो रहा है तो आपको क्या करना चाहिए।

1) गहरी सांस लें और लंबी सांस छोड़ें, इससे हृदय दर और ब्लड प्रेशर कम होते हैं, सांस की गति कंट्रोल में रहती है।
2) एग्जाम से पहले कम से कम 8 घंटे की नींद लें। नींद पूरी होने से पढ़ाई लंबी समय तक मेमोरी में रहती है।
3) लास्ट मिनट रिवीजन से बचें, क्योंकि इससे पिछली पढ़ाई की गति को कंफ्यूजन में डाल सकता है।
4) एग्जाम के बाद पेपर को डिस्कस न करें, ताकि स्वयं को डाउट्स से बचा सकें।
5) एग्जाम से पहले और एग्जाम के दौरान अच्छे से पानी पिए।
6) पर्याप्त पानी पीने से ब्रेन की परफ़ॉर्मेंस में सुधार हो सकता है।
7) अपनी पढ़ाई के स्थान को साफ-सुथरा रखें, ताकि मानसिक स्वच्छता बनी रहे।
8) हर 45 मिनट के बाद 10 मिनट का छोटा ब्रेक लें, ताकि ध्यान केंद्रित रहे।
9) एग्जाम समय में मोबाइल नोटिफिकेशन को बंद करें, ताकि न केवल पढ़ाई में रुकावट हो, बल्कि ध्यान भी बना रहे।
10) एग्जाम के समय चाय/कॉफी और निकोटिन का सेवन कम करें, क्योंकि इन्हें लंबे समय तक लेते रहने का मानसिक स्थिति पर असर हो सकता है।
11) एक ही सब्जेक्ट पर एक समय में ध्यान केंद्रित करें, जिससे अध्ययन में एकाग्रता बनी रहे।
12) फ्लेक्सिबल शेड्यूल बनाएं और उसे बदलने के लिए तैयार रहें, ताकि नियमितता बनी रहे और मोटिवेशन कमजोर न हो।
13) एग्जाम से पहले फ्लो चार्ट बनाएं और सैंपल पेपर से अभ्यास करें, जिससे आत्म-मूल्यांकन हो सके।

साइकोलॉजिस्ट गौरव गिल ने छात्रों के लिए कंसंट्रेशन एक्सरसाइज़ भी बताई हैं। उन्होंने कहा कि कंसंट्रेशन बढ़ाने के लिए, स्टूडेंट्स को एक पेज से किसी भी लाईन उठाने के बाद किसी भी एक लेटर को काटकर गिनने का अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा वह बोले कि गाना सुनते समय भी केवल एक इंस्ट्रूमेंट पर फोकस करके कंसंट्रेशन को मजबूत किया जा सकता है। इस तरीके से, स्टुडेंट्स अपनी ध्यान सकारात्मकता को बढ़ा सकते हैं।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।