मध्य प्रदेश के ग्वालियर की स्वास्थ्य एवं उद्यमिता जगत में सक्रिय प्रियंका कुशवाह जो कि सीओओ हैं ‘आयुर्टीन वेलनेस सेंटर’ की, सेंटर का लक्ष्य केवल बीमारियों का उपचार नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। प्रियंका का मानना है कि आज के दौर में देश को केवल अस्पतालों और सर्जनों की नहीं, बल्कि ऐसे हेल्थ कोच की आवश्यकता है जो लोगों को बीमारी से पहले स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बना सकें।
ग्वालियर सें आयुर्टीन वेलनेस सेंटर की चीफ ऑपरेशनल ऑफिसर प्रियंका कुशवाह का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान केवल दवाओं में नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने में छिपा है। करीब एक वर्ष पहले शुरू हुए इस वेलनेस सेंटर की स्थापना का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद, योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करना है। प्रियंका बताती हैं कि पिछले 15 वर्षों से वे युवाओं को उद्यमिता और करियर के क्षेत्र में मार्गदर्शन देती रही हैं। इसी दौरान उन्हें ऐसा स्टार्टअप शुरू करने का विचार आया, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सके।
आयुर्टीन वेलनेस सेंटर एक समग्र (होलिस्टिक) स्वास्थ्य मॉडल पर काम करता है, जिसमें आयुर्वेद, पंचकर्म, नैचुरोपैथी, योग, मेडिटेशन और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट को एक साथ जोड़ा गया है। प्रियंका का कहना है कि उनका पहला उद्देश्य लोगों को बिना दवा और सप्लीमेंट के स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। सेंटर में विभिन्न प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों और थेरेपी के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से उबरने में मदद दी जाती है। उनका मानना है कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है, जो व्यक्ति को शरीर, मन और जीवन के संतुलन को समझना सिखाती है।
प्रियंका कुशवाह एक मोटिवेशनल स्पीकर, फाइनेंशियल एजुकेटर और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। उन्होंने ‘उदयभव सोसाइटी फॉर विमेन एम्पावरमेंट’ के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने, कानूनी अधिकारों की जानकारी देने और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का अभियान भी शुरू किया है। युवाओं को संदेश देते हुए प्रियंका कहती हैं कि अवसरों की कमी नहीं है, बल्कि सही दिशा में सीखने और स्वयं को तैयार करने की आवश्यकता है। उनका विश्वास है कि यदि व्यक्ति सीखने की निरंतर इच्छा बनाए रखे और अपने कौशल को विकसित करता रहे, तो सफलता के रास्ते स्वयं खुलते चले जाते हैं।





